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मनु का विरोध क्यों ? विषय पर प्रगति मैदान में वैचारिक बैठक संपन्न

विश्व पुस्तक मेले, प्रगति मैदान में आर्यसमाज द्वारा “मनु का विरोध क्यों” विषय पर वैचारिक बैठक दिनांक 15 जनवरी, 2017 को हाल नंबर 8 में साहित्य मंच पर संपन्न हुई। इस कार्यक्रम में डॉ विवेक आर्य, शिशु रोग विशेषज्ञ द्वारा मनुस्मृति के विषय में आर्यसमाज की मान्यताओं को पावर पॉइंट प्रेसेंटेशन द्वारा प्रस्तुत किया गया। वर्तमान में हमारे देश की राजनीती ने हिन्दू समाज की सबसे बड़ी बुराई जातिवाद को समाप्त करने के स्थान पर इतना प्रोत्साहन दिया हैं कि समाज का एक विशेष वर्ग मनुवाद, ब्राह्मणवाद के नाम पर सारा दिन अनर्गल प्रलाप करता फिरता हैं। विडम्बना देखिये की इन सभी में से किसी ने मनुस्मृति को पुस्तक आकार तक में अपने जीवन में नहीं देखा। उसका स्वाध्याय, चिंतन और मनन तो बहुत दूर की बात थी। स्वामी दयानंद ऐसे पहले व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपने अन्वेषण से यह सिद्ध किया कि मनुस्मृति प्रक्षेप अर्थात मिलावट हुई है। इस कारण से यह प्रतीत होता है कि मनुस्मृति जातिवाद, नारी को निम्न स्तर , मांसाहार आदि का समर्थन करती हैं। सत्य यह है कि प्रक्षेप हटाने के पश्चात मनुस्मृति के मौलिक रूप को स्वीकार करने में समाज का हित है। मनु सृष्टि के प्रथम विधि निर्माता है। मनुस्मृति वेदों के अनुकूल धर्मशास्त्र है जिसका उद्देश्य समस्त मानव जाति को कर्त्तव्य-अकर्तव्य का बोध करवाना हैं। इसलिए मनुस्मृति को जलाने से कुछ नहीं होगा। अपितु उसमें दिए गए ज्ञान के भंडार को ग्रहण कर उसपर आचरण करने में सभी का हित हैं।
 
आर्यसमाज द्वारा आर्यसमाजों के बाहर निकल कर सार्वजानिक मंचों से वैदिक सिद्धांतों का प्रचार किया जाये। तभी आप जनसाधारण तक पहुचेंगे। यह वैचारिक बैठक उसी प्रचार नीति का भाग थी। आशा है बाकि आर्यजन भी इस विचार को बढ़ाने में अपना योगदान देंगे। इस कार्यक्रम में शंका समाधान सबसे रोचक विषय रहा। अनेक डॉक्टर, इंजीनियर, सरकारी कर्मचारियों से लेकर कॉलेज के छात्रों ने जातिवाद के विरुद्ध कार्य करने का विचार शंका समाधान कार्यक्रम के अन्तर्गत रखा। आर्यसमाज के पक्ष को सुनकर वहां पर उपस्थित मुस्लिम एवं दलित श्रोताओं में कोई विरोधाभास नहीं दिखा क्योंकि यह सत्य सिद्धांतों पर आधारित था।
    
इस कार्यक्रम का मंच संचालन दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री श्री विनय आर्य जी द्वारा किया गया। उपस्थित आर्यजनों में श्री देव शर्मा जी आर्य विद्वान, श्री राजकुमार आर्य प्रधान आर्यसमाज मुलतान नगर , अजय आर्य वैदिक साहित्य प्रकाशक ने मंच की शोभा बधाई। बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम को सुना। इस अवसर पर डॉ सुरेंदर कुमार लिखित मनु का विरोध क्यों? लघु पुस्तिका को सभी श्रोताओं में वितरित किया गया एवं अजय आर्य जी द्वारा प्रकाशित पंडित गंगाप्रसाद उपाध्याय जी रचित मनुस्मृति को खरीदने की प्रेरणा दी गई।
 
नरेंद्र सोनी आर्य