कविता

हमारी असलियत

काश्मीर का हाल जानकार  ।

हम निंदा और कड़ी कर देंगें ॥

इससे अधिक क़ि आस न करना  ।

वरना हम सत्ता खो देंगें॥

यदि जवान को थप्पड़ पड़ते ।

वेतन तो हम देते हैं ।

हमारी गाय को मार कर देखो ,

बदला कैसे लेते हैं ॥

लाहौर लेकर क्या करेंगे ,

काश्मीर ही भारी है ।

नागरिकों का सब्र देखने की  ।

अब हमारी  बारी है ॥

सबको सपना दिखाया हमने

लुभावना भीना भीना ।

सैनिकों के पीछे छुपकर ,

दिखाते हम ५६ का सीना ॥

पहले थे उड़ाते कबूतर ,

अब मंदिर बनवाएंगे ।

काश्मीर के मुद्दे को   ।

जोर शोर से उठाएंगें ॥

इसी इसी में, कट जाएंगे सालों साल  ।

तब तक शासन  करके ,

हम हो जायेंगे मालामाल  ॥

रविन्दर सूदन

शिक्षा : जबलपुर विश्वविद्यालय से एम् एस-सी । रक्षा मंत्रालय संस्थान जबलपुर में २८ वर्षों तक विभिन्न पदों पर कार्य किया । वर्तमान में रिटायर्ड जीवन जी रहा हूँ ।