कविता

आया सावन

ठंडी –  ठंडी  सी पुरवाई।
हौले –  हौले  से बहती है।।
कानों  में चुपके- चुपके से।
संदेश तेरा  कुछ कहती है।।

आँखों  में   नव – आशायें।
अधरों पर  मुस्कान   लिए।।
हृदय – बंधन  प्रीत -अगाढ।
सस्नेह  प्रेम – सम्मान  लिए।।

शीत  चँद्रमा श्वेत धवल सा।
बदरा  में छुप जा  बैठा  है।।
ना आने के दु:ख में तेरे देखो।
तज़ निशा मुख फेर बैठा है।।

नव- गीत प्रेम का गाकर मैं।
तुमको  पास   बुलाती   हूँ।।
मन  के अंधियारे अँगना  में।
नित आशा दीप जलाती  हूँ।।

सूनी -सूनी   सी  गलियों में।
अँखियाँ  आस   लगाती  हैं।।
व्याकुल   हृदय   की ये गंगा।
अंश्रू बन बह- बह जाती हैं।।

रिमझिम सावन की बरखा में।
तुमको  आवाज  लगाती  हूँ।।
सावन   के  इन   झूलों पर।
मैं प्रेम  की  पेंग बढाती हूँ।।

-लक्ष्मी थपलियाल-
दे.दून,उत्तराखंड

लक्ष्मी थपलियाल

पिता का नाम :- श्री गिरीश प्रसाद गौड माता का नाम:-श्रीमती मीना गौड जन्म तिथि:- २-६-१९७८ जन्म स्थान:-देहरादून,उत्तराखंड शिक्षा:-पोस्ट ग्रेजुएट समाजशास्त्र विषय से व्यवसाय:-स्व व्यवसाय मोबाइल न. ८९५८९३३३३५