मुक्तक/दोहा

दोहे

कड़ी धूप ऐसी पड़ी, धरा गई सब सूख।
गर्मी का मौसम हुआ, पड़े जोर की धूप।।

गर्मी के संताप से,……….धरा हुई बेहाल।
जून मास की दुपहरी, तन मन हुआ निढाल।।

कर्ज में डूबा किसान, माथे शिकन हजार।
उल्टा-सीधा व्याज दे, खुद भूखा लाचार।।

फसलें चौपट हो गई….जल का हुआ अभाव।
बिषम परिस्थिति सामने, मन में होत तनाव।।

बीज वो दिए खेत में……..करें खेत खलिहान।
फसल काटकर खेत से, खुश है आज किसान।।

मेहनत करे लगन से,….माने कभी न हार।
कृषक देवता आप ही, जीवन का आधार।।

✍ सुमन अग्रवाल “सागरिका”
आगरा

सुमन अग्रवाल "सागरिका"

पिता का नाम :- श्री रामजी लाल सिंघल माता का नाम :- श्रीमती उर्मिला देवी शिक्षा :-बी. ए. ग्रेजुएशन व्यवसाय :- हाउस वाइफ प्रकाशित रचनाएँ :- अनेक पत्र- पत्रिकाओं में निरन्तर प्रकाशित। सम्मान :- गीतकार साहित्यिक मंच द्वारा श्रेष्ठ ग़ज़लकार उपाधि से सम्मानित, प्रभा मेरी कलम द्वारा लेखन प्रतियोगिता में उपविजेता, ताज लिटरेचर द्वारा लेखन प्रतियोगिता में तृतीय स्थान, साहित्य सुषमा काव्य स्पंदन द्वारा लेखन प्रतियोगिता में तृतीय स्थान, काव्य सागर द्वारा लेखन प्रतियोगिता में श्रेष्ठ कहानीकार, साहित्य संगम संस्थान द्वारा श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान, सहित्यपिडिया द्वारा लेखन प्रतियोगिता में प्रशस्ति पत्र से सम्मानित। आगरा

One thought on “दोहे

  • सुमन अग्रवाल "सागरिका"

    Thanks

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