कविता

आयी सुहानी तीज

चली मनाने तीज सखी सब ,झूले डाले बागों में ।
गीत मनोहर छेड़ रही हैं ,मीठे -मीठे रागों में ।।1।।
खेतों में लहराई फसलें ,है बहार चहुँ ओर दिखी ।
बदरा बन चूनर उड़ जाए ,नाचे मन का मोर सखी ।
पवन करे व्यवहार अनूठा ,इतराकर  इस मौसम में ।
वसुधा का चुम्बन लें बूँदे ,बलखाकर इस मौसम में ।
गीत खुशी के गूंथे मनवा ,स्वर लहरी के धागों में ।।2।।
चली मनाने तीज सखी सब ,झूले डाले बागों में ।।
प्रीत छलकती इन्ही दिनों में ,दिखे  लालिमा गालों पर ।
हिय में सुनती मधुरिम बंसी ,श्याम बजाते अधरों पर ।
कर सोलह सिंगार सजनिया ,मौसम से तकरार करे ।
गए हुए परदेस सजन से ,आने को मनुहार करे ।
केस कमरिया पर लहराए ,ज्यों हरकत हो नागों में ।।3।।
 चली मनाने तीज सखी सब ,झूले डाले बागों में ।।
रीना गोयल

रीना गोयल

माता पिता -- श्रीओम प्रकाश बंसल ,श्रीमति सरोज बंसल पति -- श्री प्रदीप गोयल .... सफल व्यवसायी जन्म स्थान - सहारनपुर .....यू.पी. शिक्षा- बी .ऐ. आई .टी .आई. कटिंग &टेलरिंग निवास स्थान यमुनानगर (हरियाणा) रुचि-- विविध पुस्तकें पढने में रुचि,संगीत सुनना,गुनगुनाना, गज़ल पढना एंव लिखना पति व परिवार से सन्तुष्ट सरल ह्रदय ...आत्म निर्भर