कविता

कोरोना को हराना है

हमेशा आबाद रहने वाले देश में
देखो कैसी वीरानी छाई है
सब को बंद करने अपने घरों में
कोरोना नामक नापाक बीमारी आई है

अद्भुत संस्कृति अद्भुत सरंचना वाले देश मे
हर कोई बना हुआ इसका शिकार है
बिना किसी हर्षोल्लास और आयोजन के
अद्भुत तरीके से साथ मे जूटे परिवार है

पुरातन परम्पराओं और पुरातन पद्धति की
फिर चली कैसी ये बहार है
रामायण और महाभारत के संवादों संग दिनचर्या
नई पीढ़ी के लिए अनुपम उपहार है

ना लड़ाई न झगड़े ना किसी दुर्घटना के समाचार है
शीतल हवा और निर्मल जल की फुहार है
ना कचरों के ढेर न गंदगी का अंबार
शद्ध पर्यावरण की चल रही बहार है

इन सबके बीच

बंद सब व्यवसाय,बंद रोजगार के सब साधन
बंद छोटे से बड़े सब कारोबार है
क्या होगा कैसे होगा सबको यही विचार
अर्थव्यवस्था हुई कैसी ये लाचार है

भुखमरी, बेरोजगारी पलायनता ने
छेड़े अपने अपने तार है
कितने लोग अभी भी अपने परिजनों से दूर
ये सोचकर ही आते बहुत विचार है

इतना सब होने के बाद भी….
सरकारें, डॉक्टर, पुलिस, सेना और सफाई कर्मी
साथ मे प्रशाशन भी एकदम तैयार है
मिलाकर कंधे और लगा अपनी जान दाव पर
कोरोना को मिटाने सब तैयार है

आखिर में…

किसानों,अन्नदाताओं, भामाशाहों और दानदाताओं का
बहुत बड़ा सब पर उपकार है
वसुदेव कटुम्बकम की भावना से ही
बज रहा अपने भारत का डंका

कोरोना ही नही हर एक आपदा से
हम लड़ने को तैयार है
हम लड़ने को तैयार है…..
$पुरुषोत्तम जाजु$

पुरुषोत्तम जाजू

पुरुषोत्तम जाजु c/304,गार्डन कोर्ट अमृत वाणी रोड भायंदर (वेस्ट)जिला _ठाणे महाराष्ट्र मोबाइल 9321426507 सम्प्रति =स्वतंत्र लेखन