कविता

शिक्षक हमारे पारस पत्थर

शिक्षक वह पारस पत्थर है जो
पत्थर को भी कुंदन कर देते
गढ़कर नित नये सोपान
शिखर तक हम सबको पहुँचाते
ज्ञानहीन अबोध मस्तिष्क में
विनयशील गुण तप भर देते
बुरे मार्ग से हमें बचाकर
प्रगति का मार्ग दिखलाते
संस्कार पावन भर देते
सत जीवन सिखलाने वाले
अखंड ज्योति जला ज्ञान का
जिसने हमारा जीवन सफल बनाया
कला -कौशल ज्ञान दाता
तिमिर नाश कर प्रकाश भर देते
देश प्रेम की बहाकर धारा
राष्ट्र क्या बोल रहा था नव निर्माण कराते
डांँट -डपट अनुशासन देकर
खुशियों का मधुबन है देते
मोम जैसे खुद को पिघलाकर
हम सबको सच्ची राह दिखलाते
करे वंदन अभिनंदन हम उन शिक्षक का
जो हम सब का भाग्य विधाता
दीपक पुंज स्वतः बनकर वह
 हमारा जीवन ज्योतिमय कर देते ।
— डॉ मीनाक्षी कुमारी

डॉ. मीनाक्षी कुमारी

प्लस टू शिक्षिका मधुबनी( बिहार)