मुक्तक/दोहा

तीन मुक्तक

1
किसी के साथ मक्कारी न करना
चलाकी की अदाकारी न करना ।
भरोसा और हो विश्वास जिनको
कभी उससे तू गद्दारी न करना ।
2
सर्द है मौसम सुहाना लगता मंज़र आज़कल।
बदला बदला सा लगे दिन रात अंबर आज़कल।
बंद कर लो घर के दरवाज़े लगा दो खिड़कियाँ,
ठंडी – ठंडी ये हवा लगती है खंज़र आज़कल।
3
प्यार आंखों को तरसता छोड़ देता
और दिल को ये तड़पता छोड़ देता ।
ये हँसी आंखें समंदर बन जाती है
और दिल को भी ये प्यासा छोड़ देता ।

— अंजु दास गीतांजलि

अंजु दास गीतांजलि

पति - श्री संजय कुमार दास शिव शक्ति नगर ,पंचायत भवन नेवालाल चौक , पूर्णियाँ ( बिहार ) पिन नं -854301 मोबाइल नं -9471275776