कविता

नारी सौंदर्य

नारी हूं मैं ,
अपने घर की खूबसूरत ,
किलकारी हूं मैं ,
आज बेटी हूं ,
तो कल किसी और ,
घर की लक्ष्मी ,
कभी दुर्गा तो कभी काली ,
नारी हूं मैं ।
पूरा संसार चलाने की ,
ताकत  रखती हूं मैं ,
अपने पिता की शान हूं मैं ,
मेरी पहचान ,
मेरे घुंघराले बाल ,
मेरी एक मुस्कान ,
जो मेरे पूरे परिवार की ,
गमों को भुला देती है ।
नारी की कोमलता इतनी कि ,
हर कठोरता को पिला देती है ।
— नीलू कानू प्रसाद

नीलू कानू प्रसाद

उदलाबारी , बंगाल