लघुकथा

लघुकथा : सिफ़ारिश

आज इंटरव्यू के बाद रमेश के चेहरे पर काफ़ी थकान और निराशा थी । वह एकदम से घर आकर किसी से कुछ न बोला और  हाथ-मुँह धोकर अपने कमरे में अपनी झूलेनुमा जालीदार चेयर पर आँखें बंद कर झूलता रहा । कब उसकी आँख लग गई उसे पता ही न चला ।

माँं-  “रमेश बेटा उठो रात के आठ बज गए ! शाम पाँच बजे से यहीं हो, मैने सोचा थकान अधिक लग रही है सोने देती हूँ ।  चलो कुछ खा लो ।”
रमेश- ” नहीं मॉम जरा भी भूख नहीं है ।”
माँं ” क्या हुआ? क्यों परेशान होता है, जल्द ही तेरी पसंद की नौकरी तुझे जरूर मिल जाएगी ।”
“माँं -शायद ऐसा कभी न हो !” रमेश ने निराश मन से मुँह फेरते हुए कहा ।
माँं -“ऐसा क्यों कहता है बेटा ! आज कुछ हुआ क्या ? मुझे बता ।”
“मॉम आपको याद है, फूफाजी मेरे स्कूल के चेयरमैन थे, और तुम हमेशा कहती थी –  “जा रमेश स्कूल में तुझे कोई कुछ नहीं कहेगा, अगर कोई कहेगा तो तेरे फूफाजी देख लेंगे । “
मैं बच्चा था, मैं नहीं समझ पाया और हजारों गलतियाँ की। अध्यापिकाओं, बच्चों सभी को परेशान करता रहा । सिफ़ारिश का फायदा उठाता रहा । खराब हैंड राइटिंग के बावजूद गलतियों के बावजूद भी धौंस में जिया और जिसकी वजह से वास्तविक ज्ञान में बहुत पीछे रह गया । रोज नौकरी के लिए जब धक्के खा रहा  हूँ , तो पता चल रहा है कि मैं कितना गलत था ।”
” ऐसा क्या हो गया रमेश बेटा ! माँं ने पूछा ।
माँं आज मैं जिस सरकारी नौकरी के  इंटरव्यू में गया, उस पैनल के मुख्य साक्षात्कार कर्ता मेरे विधालय की हिंदी अध्यापिका के पति थे । जिन्हें मेरे दुर्व्यवहार के कारण स्कूल से जाना पड़ा । जब उन्होंने इंटरव्यू के समय मेरा बायोडाटा देखा तभी बोला कि तुम हो वो सिफारशी बच्चे जो अधूरे ज्ञान के साथ उजाला देने वाले दीये बुझाते आए हो ! आज मैं अपने लक्ष्य के नजदीक  पहुँच कर भी रीते हाथ लौट आया ।
— भावना अरोड़ा ‘मिलन’

भावना अरोड़ा ‘मिलन’

अध्यापिका,लेखिका एवं विचारक निवास- कालकाजी, नई दिल्ली प्रकाशन - * १७ साँझा संग्रह (विविध समाज सुधारक विषय ) * १ एकल पुस्तक काव्य संग्रह ( रोशनी ) २ लघुकथा संग्रह (प्रकाशनाधीन ) भारत के दिल्ली, एम॰पी,॰ उ॰प्र०,पश्चिम बंगाल, आदि कई राज्यों से समाचार पत्रों एवं मेगजिन में समसामयिक लेखों का प्रकाशन जारी ।