गीत/नवगीत

पावस गीत

आशाओंं का दीप जला लो,  तुम भी अपने मन में।

हम तुम झूला झूलेंगे अब की फिर से सावन में।।

देखो पुरवा लेकर अाई,  प्यारा मौसम बड़ा सुहाना ।

बारिश की बूंदों ने गाया, कैसा अनुपम गीत अजाना।।

अनुभव होता मुझे तुम्हारा, इन बूंदों के चुम्बन में।

हम तुम झूला झूलेंगे अब की फिर से सावन में।।

देखो इस धरती ने फिर से  चूनर भी हरी पहन ली है।

ऐसा लगता है मानों ये, अपने पिय के देश चली है।

बादल भी फिर झूम उठा है, धरती के आमंत्रण में।

हम तुम झूला झूलेंगे, अब की फिर से सावन में।।

 — सौष्ठव

सौष्ठव त्रिपाठी

विधा - गीत, ग़ज़ल, छंद, मुक्तक आदि। संप्रति- बेसिक शिक्षा परिषद् उत्तर प्रदेश में कार्यरत पता- कस्बा एवं पोस्ट किशनपुर जनपद फतेहपुर उत्तर प्रदेश 212658