कविता

आस्तीन के सांप

हम उनकी हर गलती को नजरअंदाज करते रहे

वे नफरत के खंजर पीठ पीछे घोंपते रहे 

हम मासूम से समझ उन्हें हर क्षण माफ करते रहे

वे इसे हमारी कमजोरी समझ, चाल पर चाल चलते रहे 

हम उनकी हर अच्छी- बुरी बात मानते रहे 

वे हमारे घावों पर नमक लगाते रहे 

हम आंख बंद कर विश्वास करते रहे 

वे नफरत के खंजर पीठ पीछे घोंपते रहे 

हम उन्हें इज्जत के इत्र से नहलाते रहे 

वे मुंह पर हमारे कालिख मलते रहे 

हम उनकी हर गलती को नजरअंदाज करते रहे

वे आस्तीन के सांप- हम दूध पिलाते रहे, वे डसते रहे

— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111