कविता

हर बूंद कहती हैं कहानी

हर बूंद कहती हैं कहानी,आंखों से बहता जब पानी।
मिलती है जीवन में हानी,व्यथा मनकी किसने जानी।
हाल बेहाल है जब होता, चुपके चुपके दिल है रोता।
छूट जाएं अपने सहारे, फीके लगते सभी नजारे।
मन दुखी को कुछ नहीं भाता,दूर नजर अंधेरा आता।
बदरंग होती है जवानी, साथी की जब होती रवानी।
सब के होते रहे अकेला, आती है जब कष्ट की बेला।
बिछुड़े न कोई मीत प्यारा, होता है जो सबका सहारा।
बिन माली बगिया उदासी, जैसे जल में मीन प्यासी।
पतझड़ में लगती वीरानी, होती है नहीं ऋतु सुहानी।
हृदय तब होता है सूना, दर्द देता है विरह दूना।
बिन मेघा तड़ित कड़के, ऐसे विरहन का दिल धड़के।
तार तार दिल होते टुकड़े, कौन जाने दिल के दुखड़े।
आंखों से तब बहता पानी, यादें आती बन तूफानी।

— शिव सन्याल

*शिव सन्याल

नाम :- शिव सन्याल (शिव राज सन्याल) जन्म तिथि:- 2/4/1956 माता का नाम :-श्रीमती वीरो देवी पिता का नाम:- श्री राम पाल सन्याल स्थान:- राम निवास मकड़ाहन डा.मकड़ाहन तह.ज्वाली जिला कांगड़ा (हि.प्र) 176023 शिक्षा:- इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे कर सहायक अभियन्ता के पद से रिटायर्ड। प्रस्तुति:- दो काव्य संग्रह प्रकाशित 1) मन तरंग 2)बोल राम राम रे . 3)बज़्म-ए-हिन्द सांझा काव्य संग्रह संपादक आदरणीय निर्मेश त्यागी जी प्रकाशक वर्तमान अंकुर बी-92 सेक्टर-6-नोएडा।हिन्दी और पहाड़ी में अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। Email:. Sanyalshivraj@gmail.com M.no. 9418063995