हर बूंद कहती हैं कहानी
हर बूंद कहती हैं कहानी,आंखों से बहता जब पानी।
मिलती है जीवन में हानी,व्यथा मनकी किसने जानी।
हाल बेहाल है जब होता, चुपके चुपके दिल है रोता।
छूट जाएं अपने सहारे, फीके लगते सभी नजारे।
मन दुखी को कुछ नहीं भाता,दूर नजर अंधेरा आता।
बदरंग होती है जवानी, साथी की जब होती रवानी।
सब के होते रहे अकेला, आती है जब कष्ट की बेला।
बिछुड़े न कोई मीत प्यारा, होता है जो सबका सहारा।
बिन माली बगिया उदासी, जैसे जल में मीन प्यासी।
पतझड़ में लगती वीरानी, होती है नहीं ऋतु सुहानी।
हृदय तब होता है सूना, दर्द देता है विरह दूना।
बिन मेघा तड़ित कड़के, ऐसे विरहन का दिल धड़के।
तार तार दिल होते टुकड़े, कौन जाने दिल के दुखड़े।
आंखों से तब बहता पानी, यादें आती बन तूफानी।
— शिव सन्याल
