विह्स्की विला – भाग 2
इन्स्पेक्टर के सवालों से छुटकारा मिलते ही मैने ऐसा महसूस किया जैसे मुझे काले पानी से रिहाई मिल गई हो। जब मैं कर की तरफ बढ़ रहा था तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरे पैरो में किसी ने हजार – हजार किलों के पत्थर बांध दिए हों।
ड्रायविंग सीट पर बैठते हुए मैने एक नज़र पीछे की सीट पर और फिर अपने बगल की सीट पर डाली। मेरे दिल में हूक उठी।
आज जिन समरीन मैडम को मैंने उनके अपने ही लहू में सराबोर फर्श पर पड़े देखा था वही सबरीन मैडम पिछले न जाने कितने अर्से से कभी मेरे पीछे के सीट पर और कभी मेरे बगल के सीट पर बैठ कर मुझे अपने रूमानी हुस्न से सरशार करती रही थीं।
इंस्पेक्टर के कहने पर मैने उसके सामने ही समरीन मैडम की एकलौती औलाद ज्वाइस को काल करके उसकी मॉम की इस होलनाक मौत की सूचना दी, जिसे सुनकर वो फोन पर ही रोने लगी। फ़ोन का स्पीकर ऑन होने की वजह से ज्वाइस के रोने की आवाज़े इन्स्पेक्टर के कानो में पड़ी थी। मैडम समरीन के शोहर एक बहुत ही व्यस्त बिजनेसमैन थे और काम के सिलसिले में अक्सर देश विदेश घूमते रहते थे। इस वक्त वो दुबई में थे और उनका नंबर खाकसार के पास उपलब्ध नहीं था तो इंस्पेकटर की हिदायत पाकर मैने ज्वाइस को समरीन मैडम के शोहर को खबर देने की बात कही। मैने ज्वाइस से अपने पापा की जगह समरीन मैडम के शोहर को खबर देने की बात क्यों कही, इसकी तफ्सील खुद – बा खुद आगे के अफ़साने में खुल जायगी। वैसे मैं जानता था मेरी इस बात को उस शातिर इन्स्पेक्टर ने जरूर नोटिस में लिया होगा। ख़ैर ज्वाइस जो इस वक्त लख़नऊ में थी, अपनी मोम के इंतकाल की खबर पाके फ़ौरन कानपुर के लिए रवाना हो गई।
समरीन मैडम के इंतकाल की खबर उनके बंगले में पहुँच गई थी, जिसे सुनकर केयरटकर्स मतलब घर के नौकरों में उदासी पसर गई थी। उन सबका उदास होना लाज़िमी भी था आखिर समरीन मैडम उन सभी पर काफी रहमदिली से पेश आती रही थी।
गाड़ी बंगले के पोर्च में लगाकर मैं अपने लिए अलाट कमरे में जाकर एक कुर्सी पर ढेर हो गया। खुद को रिलेक्स करने की कवायद में मैने ज्यों ही अपनी आंख्ने बंद की मेरे जेहन में फर्श पर दीदा फाड़े खून में नहाई समरीन मैडम का बेजान शरीर नुमाया हो उठा।
मैने अपनी आंख्ने और तेजी से भींच कर पुश्त से सर टिकाकर कुर्सी पर शरीर को ढीला छोड़ दिया।
हालाँकि मेरे ख्यालों में उस वक्त सिर्फ और सिर्फ समरीन मैडम थी पर भी कुछ देर में मैने खुद को शून्य में जाते हुए महसूस किया और मेरा जिस्म उसी अवस्था में निढाल हो गया।
ना जाने मैं कब तक उसी तरह कुर्सी पर अचेतन अवस्था में रहा मुझे नहीं पता और जब मेरी चेतना लौटना चालू हुई तो मुझे लगा जैसे कोई मेरे कंधे हौले – हौले दबा रहा हो।
मैं कुछ देर कंधो की मसाज का नीमबेहोशी की हालत में लुत्फ़ लेता रहता और फिर जब वो नरम हथेलिया मेरे कंधे से गर्दन के रस्ते मेरे सर पे आकर मेरे बाल तरतीब और बेतरतीब करने लगे तो तो मेरी नीमबोहोशी दरक गई।
आहिस्ता से आँखें खोल कर मैने गर्दन को ऊपर के ज़ानिब उठाया तो मेरे माथे को महकती हुई गर्म सांसो ने छुआ।
ज्वाइस से आँखे मिलते ही मैने उठने की कोशिश की तो उसने वापस मेरे कंधे पकड़ कर मुझे बैठे रहने का इशारा किया।
कुछ देर बाद मेरे सामने आते हुए ज्वाइस बोली ‘गालव आप थक गए होंगे थोड़ा लेट कर आराम कर लीजिये।’
मैने ज्वाइस को देखते कहा मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था चलो हॉस्पिटल चलते हैं वहां तुम्हे तुम्हारी मॉम का पोस्टमार्टम होना है और फिर पुलिस इंस्पेक्टर से भी मिलना है।
मेरी बात सुनके ज्वाइस ने इकरार में सर हिलाया और मेरे कमरे से बाहर निकल गई।
–सुधीर
