बाल-कविता – गेंहूँ एवं कपास
राष्ट्रीय फूल उत्पल, शतदल जलज कमल है.
गेंदा, गुलाब, जूही, सूरजमुखी विकल है.
अपराजिता कुमुदिनी, हैं केतकी सुभागा.
बेला लिली चमेली, का स्वाभिमान जागा.
मधुमालती मधुरिका, मधुकामिनी बिगड़ती
तो मोगरा न गुड़हल, पर माधवी अकड़ती.
सूरजमुखी दुखी हो, हर पुष्प को बुलाये..
चर्चा विशद कराती, गेहूँ कपास आए.
उपयोगिता बताओ, है श्रेष्ठ कौन बोलो.
गेहूँ कपास चुप हैं, मुँह आप लोग खोलो.
— दिनेश चन्द्र गुप्ता ‘रविकर’
