भावनाओं का भंवर
भावनाएं आवारा बादल की तरह
उमड़-घुमड़ कर शोर मचाये
कभी ठंढ़ी फुहार बन हलचल मचाये
कभी गर्जन कर हमें डराये
ऐसी सोच पर हंसी आये
उम्र के हर पायदान पर
तटस्थ भाव में जिसने रहना सीख लिया
मानों वह रणविजय बन गया ।
भावनाओं के भंवर से उबरना जरूरी
भाग-दौड़ भरी जिंदगी में
क्या खोया और क्या पाया इसकी
गणना भूलना जरूरी
मानव तन मिला है कर्मवीर बनें
कर्म क्षेत्र सभी को सर्वश्रेष्ठ बनाये
इतिहास को याद रख मायुस जो हो जाये
आत्मकथा लिखना कभी आत्मविश्वास की कमी में सीख ना पाये ।
— आरती रॉय
