लघुकथा

वो रात!

प्रेमी-प्रेमिका की शादी हो गई थी. मधुयामिनी के मधुर पलों में उन्हें शादी के बंधन में बंधने का रोमांचक किस्सा याद आ रहा था.

रोज रात को एक सीरियल में वह देखती थी कि, एक लड़का चोरी-छिपे चोर रास्ते से अपनी प्रेमिका से मिलने जाता है. उसका हौसला भी बुलंद हो गया.

“रात को 11 बजे पीछे के दरवाजे से आना, मैं दरवाजा खुला रखूंगी.”उसने कहा था.

“ठीक है.” प्रेमी के हर्ष और उत्साह का ठिकाना नहीं था.

मूसलाधार बरसात को भी उसी दिन आना था! आई तो क्या हुआ, आशिक क्या उससे डरता है! वह प्रेमिका के घर पहुंच ही गया! लेकिन यह क्या? दाल-भात में मूसलचंद!

एक पड़ोसी की नजर पड़ गई. उसने पकड़कर “चोर-चोर” कहकर मचा दिया शोर.

बाकी पड़ोसी कैसे पीछे रहते! आखिर पड़ोसी की सुरक्षा का सवाल था. अपना धर्म निभाने को कोई वहां भागा आया, किसी ने पुलिस को फोन किया.

खूब पिटाई हुई थी उसकी. तभी पुलिस भी आ गई थी. उसे चौकी पर ले जाया गया और पूछताछ की गई.

“मैं चोर नहीं हूं. प्रेमिका के आग्रह पर मैं उससे मिलने गया था.”

“सच कह रहे हो?” पुलिस ने पूछा था.

“जी, आप जांच-पड़ताल कर सकते हैं.”

तफ़तीश की गई. उसकी बात सच निकली. फिर दोनों के अभिभावकों की रजामंदी से उन दोनों के फेरे करवाने का निश्चय किया गया.

गांव के ही एक मंदिर में दोनों की शादी करवा दी गयी. शादी के बाद वह अपनी नई-नवेली दुल्हिन को अपने साथ घर ले गया.

बरसात की वो रात ही उनका जीवन बन गई थी!

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244