गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – साथ

जीवन में कुछ ख़्वाब, अधूरे रहें तो अच्छा हैं।
आंखों में तस्वीर सजी, वो साफ़ रहे तो अच्छा हैं।
मुश्किल कितनी भी आए, तू साथ रहे तो अच्छा हैं।
बिन फेरे हों हम तेरे , ये बात रहे तो अच्छा हैं।
जिसे दिल में बसाए बैठे हैं, वो पास रहे तो अच्छा हैं।
हर लफ्ज़ में तेरा ज़िक्र रहे, ये ज़ात रहे तो अच्छा हैं।
जीवन में कुछ ख़्वाब, अधूरे रहें तो अच्छा हैं।
हर चाहत के मौसम, न पूरे हो तो अच्छा हैं।
उलझन में भी कुछ बाक़ी , अरमान रहें तो अच्छा हैं।
कुछ ज़ख्म पुराने हो जाय, पर हरे रहे तो अच्छा हैं।
चाहे जितनी अंधी आएं, तू साथ रहे तो अच्छा हैं।
बस तेरे होकर रह पाएं, कोई दर्द न हो तो अच्छा हैं।
मुश्किल कितनी भी आए, तू साथ रहे तो अच्छा हैं।

— आसिया फारूकी

*आसिया फ़ारूक़ी

राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका, प्रधानाध्यापिका, पी एस अस्ती, फतेहपुर उ.प्र