कविता

खुद को पढ़ी मैं

जिंदगी के हर एक पहलुओं को
जब-जब लिख मैंने सजाया है।।
हर बार एक नया घाव शब्दों में
नया भाव उभार ही लाया है।।

हर एक नये भाव संग जब लिखी
लेखन शैली में निखार पाया है।।
खुद के लिये लिख खुद को पढ़ती,
खुद को ही पढ़ सुकून आया है।।

पहले सोचती थी लोग क्या सोचेंगे
दर्द में सबने ताना ही सुनाया है।।
नहीं सोचती लोगों के बारे मे अब मैं
खुद के लिये जीना जो आया है।।

पहले चलाई सिर्फ दर्द पर कलम
बस दर्द ही लिखना जो आया है।।
वक्त संग जिया , अब अपने लिये
हर विषय पर लिखना जो आया है।।

सीख बहुत ही पाई जिंदगी से मैंने
अपनों का भी साथ ना मैंने पाया है
नज़र अंदाज़ कर रही रिश्तों को मैं
खुद के दर्द पर विजय मैंने पाया है।।

— वीना ‘तन्वी’

वीना आडवाणी तन्वी

गृहिणी साझा पुस्तक..Parents our life Memory लाकडाऊन के सकारात्मक प्रभाव दर्द-ए शायरा अवार्ड महफिल के सितारे त्रिवेणी काव्य शायरा अवार्ड प्रादेशिक समाचार पत्र 2020 का व्दितीय अवार्ड सर्वश्रेष्ठ रचनाकार अवार्ड भारतीय अखिल साहित्यिक हिन्दी संस्था मे हो रही प्रतियोगिता मे लगातार सात बार प्रथम स्थान प्राप्त।। आदि कई उपलबधियों से सम्मानित