वीर पराक्रमी महान् आर्य महाराजा छत्रसाल
महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड के महाराजा हुए हैं। बुन्देलखण्ड का क्षेत्र में उत्तरप्रदेश के झांसी, जालौन, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा और चित्रकूट तथा मध्यप्रदेश के दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह और सागर सम्मिलित हैं। छत्रसाल जी ने औरंगजेब की मुगल सेना को पराजित किया था और बुन्देलखण्ड के महाराजा बने थे। महाराजा छत्रसाल हिन्दू महान राजा शिवाजी से मिले थे और उन्हीं की प्रेरणा से औरंगजेब के कुशासन के विरुद्ध विद्रोह कर वह बुन्देलखण्ड राज्य पर सत्तासीन हुए थे। राजा छत्रसाल जू देव बुन्देला जी का जन्म 4 मई 1649 को बुन्देला परिवार में सराच जिला, आगरा में हुआ था। वे ओरछा के रुद्र प्रताप सिंह कुल के वंशज थे। उनकी मृत्यु 20 दिसम्बर, 1731 ई. को 82 वर्ष की आयु में हुई थी। आपके पिता का नाम श्री चम्पतराय तथा माता का नाम लाल कुंअर था। आपकी दो पत्नियां बताईं जाती हैं। एक का नाम देव कुंअरी और दूसरी पत्नी का नाम रुहानी बाई था। इनके प्रमुख पुत्रों के नाम हैं हरदे शाह, जगतराय, भारती चन्द और बेटी मस्तानी। मस्तानी उनकी दूसरी पत्नी रुहानी बाई की सन्तान थी। अपनी पुत्री मस्तानी का विवाह छत्रसाल जी ने पेशवा बाजीराव प्रथम से किया था। महाराजा छत्रसाल ने बुन्देलखण्ड पर सन् 1675 से 20 दिसम्बर, 1731 लगभग 51 वर्ष शासन किया।
महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड के एक प्रसिद्ध योद्धा एवं शासक थे। इन्हें बुन्देलखण्ड का शिवाजी भी कहा जाता है। उनके बारे में जो सामग्री उपलब्ध है उसमें उन्हें एक वीर योद्धा, कुशल संगठक और प्रतापी राजा बताया गया है। यह भी वर्णन मिलता है कि छत्रसाल ने अपने जीवन का अधिकांश समय मुगलों के विरुद्ध युद्ध वा संघषों में व्यतीत किया था। छत्रसाल जी अपने जीवन के अन्तिम समय तक मुगलों के आक्रमणों से जूझते रहे।
महाराजा छत्रसाल जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटना है कि वह अपने जीवन के आरम्भ के दिनों में मराठा शासक वीर शिवाजी महाराज से मिले थे। महाराज शिवाजी ने ही उन्हें मुगलों के विरुद्ध संघर्ष वा युद्ध करने के लिए प्रेरित किया था। उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना यह भी है कि उन्होंने अपने राज्य का एक तिहाई भाग बाजीराव पेशवा को भेंट कर दिया था। यह घटना छत्रसाल जी की बाजीराव पेशवा के प्रति सम्मान, प्रेम एवं मित्रता की प्रतीक है। छत्रसाल जी को बुन्देलखण्ड का शिवाजी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने शिवाजी की ही तरह मुगल शासकों के विरुद्ध संघर्ष किया। छत्रसाल जी के जीवन में यह भी महत्वपूर्ण है कि उन्होंने मात्र 22 वर्ष की आयु में मुगल साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह किया था। सन् 1677 में मात्र 5 घुड़सवारों और 25 पैदल सैनिकों के साथ मिलकर छत्रसाल जी ने मुगल सेना को अपने बुद्धि चार्तुय एवं वीरता से पराजित किया था।
महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड के इतिहास में एक महान राजा और योद्धा के रुप में स्मरण किये जाते हैं। उनका राज्य वर्तमान उत्तर प्रदेश एवं मध्यप्रदेश के अनेक जिलों व ग्रामों में विस्तीर्ण था। लेख को विराम देते हुए हम महावीर महाराजा छत्रसाल जी को अपनी श्रद्धांजलि प्रस्तुत करते हैं। ओ३म् शम्।
-प्रस्तुतकर्ता: मनमोहन कुमार आर्य
