कविता

दर्द अपना छिपाकर

दर्द अपना छिपाकर
हम मुस्कुराते रहे
थके-थके थे पांव
हम निरन्तर चलते रहे
जमाने को आजमाना छोड़
हम स्वयं को आजमाते रहे ।

दर्द अपना छिपाकर
हम मुस्कुराते रहे
सूरत अपनी बिगाड़ी
आईना दूसरों को दिखाते रहे
जिंदगी भर पिसे
अपनों को बचाते रहे ।

दर्द अपना छिपाकर
हम मुस्कुराते रहे ।।

— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111