दर्द अपना छिपाकर
दर्द अपना छिपाकर
हम मुस्कुराते रहे
थके-थके थे पांव
हम निरन्तर चलते रहे
जमाने को आजमाना छोड़
हम स्वयं को आजमाते रहे ।
दर्द अपना छिपाकर
हम मुस्कुराते रहे
सूरत अपनी बिगाड़ी
आईना दूसरों को दिखाते रहे
जिंदगी भर पिसे
अपनों को बचाते रहे ।
दर्द अपना छिपाकर
हम मुस्कुराते रहे ।।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
