कविता

माँ

जब जाना होगा उस माँ ने

कि जा रहा है बेटा सरहद पर

तो कितनी ही रातें वो करवट बदल बदल कर सोयी होगी

बात देश की आन बान और शान की है

बस इसी ख़ातिर वो अपने बेटे के आगे कहाँ रोई होगी

घर के आँगन में कौने में बैठी वो पत्नी

मन में उमड़ती संवेदनाओं को दबा कर

अनजानी बेचैनी में खोयी होगी

जाने दोबारा मिलना होगा भी या नहीं

यह सोच कर

जाने कितनी ही बार पलकें डुबोई होंगी 

कुछ दिनों बाद अचानक से बंद हो गया होगा

जब सारा communication 

ना आया होगा कोई फ़ोन कॉल

और ना मिली होगी कोई इनफार्मेशन

जाने कितनी कल्पनायें उसके मन ने पिरोयी होंगी

और फिर एक दिन अचानक

छा गया होगा घना अँधेरा 

उस बूढ़ी माँ और चीर प्रतीक्षित पत्नी के जीवन में

जब देखी होगी तिरंगे में लिपटी सूरत 

आख़िर हम तो कल्पना भी नहीं कर सकते

जितना हम जीवन भर नहीं रोते 

उस से भी ज़्यादा

उस परिवार की आँखें चंद मिनटों में रोई होंगी

चंद मिंटो में रोई होंगी

महेश कुमार माटा

नाम: महेश कुमार माटा निवास : RZ 48 SOUTH EXT PART 3, UTTAM NAGAR WEST, NEW DELHI 110059 कार्यालय:- Delhi District Court, Posted as "Judicial Assistant". मोबाइल: 09711782028 इ मेल :- mk123mk1234@gmail.com