नरेन्द्र मोदी : न भूतो न भविष्यति
हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है,
बड़ी मुश्किल से होता है, चमन में दीदावर पैदा ।
वह १७ सितम्बर १९५० का पावन दिन था जिस दिन भारत के यशस्वी प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी का जन्म हुआ। गुजरात के मेहसाना जिले के वाडनगर कस्बे की उस धरती को प्रणाम जिसने भारत को यह अनमोल रत्न दिया । पिता दामोदर दास और माँ हीराबा को शत कोटि नमन। नरेन्द्र मोदी ने एक बाल स्वयंसेवक के रूप में संघ को अपनाया । उन्होंने पूर्ण समर्पण के साथ संघ कार्य किया । एक लंबे समय तक उन्होंने एक पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता अर्थात प्रचारक के रूप में भारत माता की सेवा की। व्यक्ति निर्माण के कार्य में दक्ष संघ ने नरेन्द्रजी के व्यक्तित्व को तराशा और निखारा। गुजरात भाजपा के अनुरोध पर पटरी से उतरे संगठन को संगठित और मज़बूत करने के लिए १९८५ में उन्हें राजनीति में भेजा गया। उन्होंने अपनी कड़ी मिहनत और दूरदृष्टि से संगठन में नये प्राण फूंक दिये। वे सबसे लंबे समय तक गुजरात के मुख्य मन्त्री रहे। उन्होंने गुजरात में विकास की गंगा बहा दी। गुजरात के मुख्य मन्त्री के रूप में उनके द्वारा किए गए आर्थिक विकास और मूल संरचना की चर्चा पूरे देश में हुई। ‘गुजरात माडेल’ विरोधियों के लिए भी आश्चर्य का विषय था। २०१३ में भाजपा ने २०१४ के लोकसभा के चुनाव के लिए मोदीजी को अपना प्रत्याशी घोषित किया। २०१४ के मई महीने में वे देश के प्रधान मंत्री बने और आजतक पूरी मिहनत, निष्ठा, लगन और समर्पण के साथ राष्ट्र का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने भारत और भारतवासियों को ऊँची सोच और उत्कृष्ट कार्य करने की प्रेरणा दी है। उन्होंने गरीबी और गाँव को निकट से देखा और अनुभव किया है। इसीलिए उनकी सारी योजनाएं गरीबी, गाँव और राष्ट्र के उत्थान के लिए समर्पित है। उनकी महत्त्वपूर्ण योजनाएं जो सफलतापूर्वक लागू की गई हैं, निम्नवत हैं —
१.उज्ज्वला योजना — गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाली जनता को मुफ़्त गैस कनेक्शन दिया गया। लगभग १०.३ करोड़ जनता इसकी लाभार्थी है।
२. प्रधानमंत्री आवास योजना – इस योजना के कारण ४.९ करोड़ गरीब जनता झोंपड़ी को छोड़ पक्के मकान में आई।
३.आयुष्मान भारत योजना — गरीबों और ७० वर्ष के ऊपर के वरिष्ठ नगरिकों के लिए लाई गई यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है। अबतक ९.४ करोड़ जनता निःशुल्क चिकित्सा का लाभ ले चुकी है।
४. जल जीवन मिशन – शहर से सटे और सुदूर गाँवों में बसे ग्रामीणों के लिए हर घर में स्वच्छ जल पहुंचाया गया। अबतक १५.७ करोड़ कनेक्शन दिए जा चुके हैं।
५.खाद्य सुरक्षा — यह विश्व की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा योजना है जिसमें देश के ८० करोड़ जनता को निःशुल्क अन्न उपलब्ध कराया जाता है।
६.जन धन और सामाजिक सुरक्षा –देश के अधिकांश नागरिकों के लिए बैंक खाते खुलवाये गए। इस समय ५६ करोड़ जनता इसकी लाभार्थी है।
७.हाई वेज — पूरे देश में उच्च गुणवत्ता के हाई वेज और एक्सप्रेस वेज का जाल बिछाया गया है।
८. स्वच्छ भारत — इस योजना के तहत अबतक गरीबों के किये ११.९ करोड़ शौचालयों का निर्माण किया गया है।
९. प्रधान मंत्री सूर्य घर योजना — फरवरी, २०२४ में आरंभ की गई इस योजना में अबतक ५२ लाख घर पंजीकृत हो चुके हैं।
१०.यू.पी आई. — इस योजना से अबतक ७५६ लाख करोड़ का धनान्तरण हुआ है।
११. जी.एस.टी. और टैक्स सुधार — टैक्स देनेवालॊं की संख्या मे वृद्धि हुई है और राजस्व बढ़ा है। टैक्स देनेवालों की संख्या १.५ करोड़ तक पहुँच गई है। २०२४-२५ में २२ लाख करोड़ की राजस्व वसूली की गई।
१२. आधार कार्ड — इससे फर्जी लाभार्थियों की पहचान की गई और सही लोगों को लाभ मिला।
१३. कोविड महामारी — भारत ने इस महामारी पर सबसे पहले नियंत्रण कर सारी दुनिया को चौंका दिया। जनता को २२० करोड़ से अधिक स्वदेशी कोविड टीके लगाए गए जो एक अत्यन्त कठिन कार्य था। यह प्रधान मंत्रीजी की दृढ़ इच्छा शक्ति का ही परिणाम था।
१४. धारा ३७० – यह धारा एकीकृत भारत के सिद्धान्त के विरुद्ध आतंकवादियों का एक बड़ा हथियार था। यह देश के लिए एक कोढ़ के समान था. मोदीजी ने इसे समाप्त कर एक देश एक विधान और एक राष्ट्रीय ध्वज की अवधारणा को स्थापित किया।
१५. आपरेशन सिन्दूर — पाकिस्तान से संचालित आतंकवादियों के संचालन और पहलगाम में आतंकवादियों के कुकृत्य का बदला लेने के लिए पाकिस्तान पर क्पतमबज ।बजपवद किया गया. यह पाकिस्तान पर सीधा हमला था जिसे सफलता पूर्वक पूरा किया गया।
यह हमारा और हमारी मातृभूमि का सौभाग्य है कि हमें नरेन्द्र मोदी जैसा राष्ट्रभक्त, दूरद्रष्टा और दृढ़ इच्छा शक्ति वाला प्रधान मंत्री मिला है। उनके ७५वें जन्म दिवस पर उन्हें शुभकामनाएं अर्पित करते हुए उनके स्वस्थ और लंबे जीवन की समस्त देशवासी इश्वर से प्रार्थना करते हैं।
(आंकड़े ज्पउमे व िप्दकपं के दिनांक १७-९-२५ के अंक से लिए गए हैं)
तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित,
सोचता हूँ मातृभूमि मैं तुझे कुछ और दूँ । वन्दे मातरम
— बिपिन किशोर सिन्हा
