कविता

गम ना कर

जो ना मिला उसका ग़म ना कर
जो मिला है उसकी खुशी कम ना कर
जिसको पा ना सका।
उसको ख्वाब समझ
जिसे पा लिया उसे लाजवाब समझ।
गुलदस्ते का हर फूल
नहीं देता खुश्बू ,
जो फूल महक बिखेरे
उसको ही गुलाब समझ।
ज़िन्दगी देती सबको
कुछ ज्यादा , कुछ कम
ज़िन्दगी कभी शोला ,कभी शबनम
ज़िन्दगी के पन्नों पर
उम्र का हिसाब रख
ज़िन्दगी को रोज पढ़
इसे, खुली किताब समझ।
हाथ, बढ़ा आसमां को छू
कर ले सितारों से गुफ्तगू
रोशनी मिले जाय जहां से
उसे आफताब ओ महताब समझ।

— अमृता राजेंद्र प्रसाद

अमृता जोशी

जगदलपुर. छत्तीसगढ़