मैं हार मानूंगा नहीं
जीवन में है संघर्ष सघन
फिर भी जिन्दा हूँ मस्त मगन
चाहें जीवन की ज्योति बुझे, संकल्प त्यागूँगा नहीं
मैं हार मानूंगा नहीं!!1!!
खुशियों का नित व्यापार करूँ
सुख दुःख दोनों स्वीकार करूँ
चाहें अंगारों पे चलना हो, पर छाँह मागूंगा नहीं
मैं हार मानूंगा नहीं!!2!!
अनमोल मिला जो मानव तन
रखिये इसका सम्पूर्ण जतन
मन में कुंठा की आग जले, वह भाव चाहूंगा नहीं
मैं हार मानूंगा नहीं!!3!!
— योगेंद्र पांडेय
