हाइकु/सेदोका

तनहा तो इतने थे

चाँद भी चुप था,
रात की नमी में डूबी—
यादें बेआवाज़।

पेड़ की शाखों पर,
साँसों का सन्नाटा था,
हवा भी बोली नहीं।

कदमों की धुन—
अपने ही साए से बातें,
रास्ता सुनता रहा।

दूर कहीं दीप,
बुझने से पहले तक—
उम्मीद चमकी थी।

मन की झील में,
पत्थर गिरा खामोशी से,
लहरें लौट आईं।

भीड़ में गुम,
चेहरे सब अपने से दूर,
सन्नाटा साथी।

वक्त की धूल,
दिल पर जमी थी हल्की—
तन्हाई बोली।

फिर भी कहीं,
सूरज की किरन उतरी,
जीवन मुस्काया।

— डॉ. अशोक

डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पिता: स्व ० यू ०आर० शर्मा माता: स्व ० सहोदर देवी जन्म तिथि: ०७.०५.१९६० जन्मस्थान: जमशेदपुर शिक्षा: पीएचडी सम्प्रति: सेवानिवृत्त पदाधिकारी प्रकाशित कृतियां: क्षितिज - लघुकथा संग्रह, गुलदस्ता - लघुकथा संग्रह, गुलमोहर - लघुकथा संग्रह, शेफालिका - लघुकथा संग्रह, रजनीगंधा - लघुकथा संग्रह कालमेघ - लघुकथा संग्रह कुमुदिनी - लघुकथा संग्रह [ अन्तिम चरण में ] पक्षियों की एकता की शक्ति - बाल कहानी, चिंटू लोमड़ी की चालाकी - बाल कहानी, रियान कौआ की झूठी चाल - बाल कहानी, खरगोश की बुद्धिमत्ता ने शेर को सीख दी , बाल लघुकथाएं, सम्मान और पुरस्कार: काव्य गौरव सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, कविवर गोपाल सिंह नेपाली काव्य शिरोमणि अवार्ड, पत्राचार सम्पूर्ण: ४०१, ओम् निलय एपार्टमेंट, खेतान लेन, वेस्ट बोरिंग केनाल रोड, पटना -८००००१, बिहार। दूरभाष: ०६१२-२५५७३४७ ९००६२३८७७७ ईमेल - ashokelection2015@gmail.com