कविता

नया साल है कण-कण में

स्वागत आज नया साल है !
नया साल है हवाओं में,
नया साल है किरणों में ;
नया साल है घटाओं में
नया साल है झरणों में ,
चारों ओर कोलाहल है ,
स्वागत है आज नया साल है ।

नया साल है पंछियों की कलरव में ,
नया साल है गीतों के सुरों में;
नया साल है नभ के सितारों में ,
नया साल है मौसम में बहारों में ;
बह रहा देखो कल कल है,
स्वागत है आज नया साल है ।

नया साल है पत्तों में फूलों में,
नया साल है धरती के कण-कण में ;
नया साल है बागों के झुलों में
नया साल है जीवन के प्रतिक्षण में ;
आ रहा धीरे से चल-चल है,
स्वागत है आज नया साल है ।

नया साल है सागर में,
नया साल है प्रेमिका के गालों में ;
नया साल है गागर में,
नया साल है मदिरा के प्यालों में ;
निखरा ,संवरा पल-पल है ;
स्वागत है आज नया साल है ।

— सुव्रत दे

सुव्रत दे

संपादक--हिन्दी-ज्योति, सेवा नर्सिंग होम के निकट , साखीपाड़ा, सम्बलपुर--768001 उडीसा। मो. 8457032905