नए वर्ष का नया सवेरा
नए वर्ष का नया सवेरा।
मिटा गया गत सघन अँधेरा।।
मास जनवरी पौष महीना।
दूर देह से हुआ पसीना।।
भरा कुहासा नहीं उजेरा।
नए वर्ष का नया सवेरा।।
पंख फुला पिड़कुलिया बैठी।
ठंडक से गौरैया ऐंठी।।
मुर्गा-मुर्गी करते फेरा।
नए वर्ष का नया सवेरा।।
छप्पर में माँ छाछ मथ रही।
ठंड लगे जब खाँय हम दही।।
पिता कर्मरत बने कमेरा।।
नए वर्ष का नया सवेरा।।
गायें भैंसें रेंक रही हैं।
झाग मुखों से फेंक रही हैं।।
लगा धरा पर ढेर अनेरा।।
नए वर्ष का नया सवेरा।।
मुख सूरज ने चमकाया है।
अंबर में बादल छाया है।।
‘शुभम्’ चहूँ दिशि घिरता घेरा।।
नए वर्ष का नया सवेरा।।
— डॉ.भगवत स्वरूप ‘शुभम्’
