धीरज
बस धीरज का छोर न छुटे
लक्ष्य हासिल करें मगर हौसला न टूटे
कठिन से कठिन डगर हो
सांसों का बंधन ना टूटे
जग में कई तरह के लोग बसे
अच्छो का साथ कभी ना छुटे
बुराई घोलती जीवन मे जहर
रिश्तों की नाव ही कुछ ऐसी
जहां संबधों का साथ न छुटे
देखलो खुली आँखों से
बस धीरज रखलो
तो कभी ना छुटे रिश्तों की दुनिया।
— संजय वर्मा “दृष्टि”
