मौन भी जो पढ़ सको
धैर्य का सम्भाव हो, तो बात है!
प्रीत की सौगात हो, तो बात है!!
मैं कहूं या तुम कहो, पर बोल में,
प्रेम की बरसात हो, तो बात है!!
घाव तन का है क्षणिक, भंगूर मगर,
घाव मन का कष्ट देता, उम्र भर!!
क्रोध के असमय त्वरित आवेग पर,
चिंता में संताप हो, तो बात है!!
ज़िन्दगी का है गणित उलझा हुआ!
रोशनी में स्याह कुछ अटका हुआ!!
एक कविता है की, मन पटल!
राग मन में बज उठे,तो बात है!!
है बहुत वाचाल, तीखे दो नयन!
भाव भी संवाद, करते हैं गहन!!
शब्द तो चाकर हैं, अपने अर्थ के,
मौन भी जो पढ़ सको तो बात है!!
— ऍम डी यस रामालक्ष्मी
