कविता

मौन भी जो पढ़ सको

धैर्य का सम्भाव हो, तो बात है!
प्रीत की सौगात हो, तो बात है!!
मैं कहूं या तुम कहो, पर बोल में,
प्रेम की बरसात हो, तो बात है!!

घाव तन का है क्षणिक, भंगूर मगर,
घाव मन का कष्ट देता, उम्र भर!!
क्रोध के असमय त्वरित आवेग पर,
चिंता में संताप हो, तो बात है!!

ज़िन्दगी का है गणित उलझा हुआ!
रोशनी में स्याह कुछ अटका हुआ!!
एक कविता है की, मन पटल!
राग मन में बज उठे,तो बात है!!

है बहुत वाचाल, तीखे दो नयन!
भाव भी संवाद, करते हैं गहन!!
शब्द तो चाकर हैं, अपने अर्थ के,
मौन भी जो पढ़ सको तो बात है!!

— ऍम डी यस रामालक्ष्मी

एम.डी.यस. रामालक्ष्मी

पति का नाम- एम.वी.यस.एन. मूर्ति शिक्षा- एम.ए. (हिन्दी), एम.फिल. (हिन्दी), डिप्लोमा इन फंक्शनल हिन्दी एंड ट्रांसलेशन, डिप्लोमा इन कम्प्यूटर (ए.पी.पी.सी.) पता- फ्लैट नं टी2, अखिला एन्क्लेव, रेड क्राॅस स्ट्रीट, गाँधी नगर, काकीनाडा - 530005 पुरस्कार- 1. काव्य रंगोली मातृत्व सम्मान 2. मुक्तक लोक साहित्य भूषण सम्मान 3. काव्य रंगोली साहित्य भूषण सम्मान प्रकाशन- अंतरा शब्द शक्ति, काव्य रंगोली, लोकजंग, मातृभाषा, धरा साक्षी, अनु गुंजन आदि पत्रिकाओं में रचना प्रकाशित ईमेल- mdsrl79@gmail.com