भजन/भावगीत

वसंत वेद वीणा मां शारदे

वसंत वेद वीणा मां शारदे ।
बुद्धिहीन हम कोरे कागज।।
कुछ भाव लिख डालो ।
शब्द भाव गम्य सुलेखानी सुधार दो
मां वीणापाणी वंदन करूं
शुभ दिन आज वसंत
कृपा तुम्हारी बनी रहे
लिखूं गीतिका प्रीति की
लिखूं गीत के बंद
मानवता की पर लिखूं
छंद लिखूं रसवंत
झंकृत कर दो मन वीणा
मेरे हृदय में कमल ज्ञान का खिले
बसा करो मां भारती
रचूं गीत गुणगान करूं

नीर भरे दृग कलशों से
तव मूरत का अभिषेक करूं मैं
शब्द प्रसून के हर बना
अर्पण तुमको मात करूं मैं
भाव को ढाल के गीत रचूँ
फिर अधरन से गुणगान करूं मैं
वासन वेद वीणा मां शारदे

— एम.डी.यस. रामालक्ष्मी

एम.डी.यस. रामालक्ष्मी

पति का नाम- एम.वी.यस.एन. मूर्ति शिक्षा- एम.ए. (हिन्दी), एम.फिल. (हिन्दी), डिप्लोमा इन फंक्शनल हिन्दी एंड ट्रांसलेशन, डिप्लोमा इन कम्प्यूटर (ए.पी.पी.सी.) पता- फ्लैट नं टी2, अखिला एन्क्लेव, रेड क्राॅस स्ट्रीट, गाँधी नगर, काकीनाडा - 530005 पुरस्कार- 1. काव्य रंगोली मातृत्व सम्मान 2. मुक्तक लोक साहित्य भूषण सम्मान 3. काव्य रंगोली साहित्य भूषण सम्मान प्रकाशन- अंतरा शब्द शक्ति, काव्य रंगोली, लोकजंग, मातृभाषा, धरा साक्षी, अनु गुंजन आदि पत्रिकाओं में रचना प्रकाशित ईमेल- mdsrl79@gmail.com