वसंत वेद वीणा मां शारदे
वसंत वेद वीणा मां शारदे ।
बुद्धिहीन हम कोरे कागज।।
कुछ भाव लिख डालो ।
शब्द भाव गम्य सुलेखानी सुधार दो
मां वीणापाणी वंदन करूं
शुभ दिन आज वसंत
कृपा तुम्हारी बनी रहे
लिखूं गीतिका प्रीति की
लिखूं गीत के बंद
मानवता की पर लिखूं
छंद लिखूं रसवंत
झंकृत कर दो मन वीणा
मेरे हृदय में कमल ज्ञान का खिले
बसा करो मां भारती
रचूं गीत गुणगान करूं
नीर भरे दृग कलशों से
तव मूरत का अभिषेक करूं मैं
शब्द प्रसून के हर बना
अर्पण तुमको मात करूं मैं
भाव को ढाल के गीत रचूँ
फिर अधरन से गुणगान करूं मैं
वासन वेद वीणा मां शारदे
— एम.डी.यस. रामालक्ष्मी
