ग़ज़ल
न कोई मिले बेसहारे चला चल
सभी ग़म को करके किनारे चला चल
छँटेंगे निराशा के बादल भी इक दिन
खुशी से तू बाँहे पसारे चला चल
अगर तुमको मेहनत पे होगा भरोसा
तो चमकेंगे किस्मत के तारे चला चल
नहीं डरके तूफान से रुक कहीं पर
अगर मौज़ है …बीच धारे चला चल
कभी गर्द चेहरे पे जमने न देना
तू किरदार अपना निखारे चला चल
रहें ग़ैर की आस में इससे अच्छा
“रमा” हौसलों के सहारे चला चल
— रमा प्रवीर वर्मा
