कविता

हिंदी की मिठास

हिंदी है भारत की बिंदी,
हिंदी मन का मान,
इसकी मधुर वाणी से
महके सारा हिंदुस्तान।
माँ की ममता सी कोमल,
गंगा जल सी पावन,
संस्कारों की यह भाषा
करती जीवन सावन।
तुलसी, सूर और कबीर की
वाणी में जो बहती,
मीरा की भक्ति बनकर
हर दिल में यह रहती।
हिंदी केवल भाषा नहीं,
यह संस्कृति की पहचान,
इसके शब्दों में बसता
भारत का गौरव-गान।
आओ मिलकर प्रण करें,
हिंदी का मान बढ़ाएँ,
ज्ञान, प्रेम और एकता का
संदेश जग में फैलाएँ।
हिंदी हमारी शक्ति है,
हिंदी हमारी शान,
इसकी मधुर मिठास से
रोशन हो हिंदुस्तान।

— आकांक्षा चचरा

डॉ. आकांक्षा रूपा चचरा

शिक्षिका एवम् कवयित्री हिंदी विभाग मुख्याध्यक्ष, कवयित्री,समाज सेविका,लेखिका संस्थान- गुरू नानक पब्लिक स्कूल कटक ओडिशा राजेन्द्र नगर, मधुपटना कटक ओडिशा, भारत, पिन -753010