सामाजिक

ज़िन्दगी अनमोल है : अपनी क़ीमत पहचानें

यह सच है कि ज़िन्दगी  एक ऐसा नायब तोहफ़ा है जिसकी कोई क़ीमत नहीं लगाई जा सकती। यह अल्फाज़ हमें एक गहरी सोच की दावत देते हैं कि हम अपनी ज़ात को दूसरों के रहम व करम पर न छोड़ें। अपनी ज़ात की अहमियत (आप न हों तो कुछ भी नहीं) “खुद को मुरझाने मत दें”। जिस तरह एक फूल अगर मुरझा जाए तो अपनी ख़ूबसूरती खो देता है, बल्कुल उसी तरह अगर इंसान ज़ेहनी या ज़ज़्बाती तौर पर हिम्मत हार जाए तो वह जिए जी मर जाता है। याद रखें, आपकी दुनिया का केंद्र आप खुद हैं। अगर आप तंदुरुस्त और खुश हैं, तभी आप अपने प्यारों और समाज के काम आ सकते हैं। ज़िन्दगी कोई हादसा नहीं “यह ज़िन्दगी कोई इतनी फ़ालतू थोड़ी है जिसे आप किसी भी वाक़िए के सुपुर्द कर देंगे”। ज़िन्दगी में उतार चढ़ाव आते रहते हैं। कभी नाकामी होती है तो कभी दिल टूटता है, लेकिन किसी एक वाक़िए या तल्ख़ याद की खातिर पूरी ज़िन्दगी को बर्बाद कर लेना दानिशमंदी नहीं है। ज़िन्दगी इतनी सस्ती नहीं कि उसे दुखों की नज़र कर दिया जाए।  इज़हार सोच का जादू “आप खुश रहेंगे तो यह दुनिया भी आपके साथ मुस्कुराएगी”। यह कायनात एक आईने की तरह है। आप जो कुछ अंदर महसूस करते हैं, वही आपको बाहर नज़र आता है। जब आप मुस्कुराते हैं और मुसबत सोचते हैं, तो आपकी ताक़त दूसरों को भी मुतासिर करती है और हालात खुद ब खुद साज़गार होने लगते हैं।  ख़ुद को मुतहरिक और पुरसकून रखें । एक्टिव रहना, सुस्ती को छोड़कर ज़िन्दगी के कामों में हिस्सा लेना। भरोसा,, अपनी सलाहियतों पर भरोसा रखना। सुकून,, अफरातफरी के दौर में अपने दिल को मुतमइन रखना।  “अपना साथ कभी न छोड़ें क्योंकि आपको आपकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है”। लोग आएंगे और चले जाएंगे, लेकिन आपकी अपनी ज़ात हमेशा आपके साथ रहेगी। जब इंसान खुद अपना बेहतरीन दोस्त बन जाता है, तो वह दुनिया की किसी भी मुश्किल का सामना कर सकता है।यह तहरीर हमें सिखाती है कि अपनी क़ीमत करना सीखें। दुनिया आपकी क़ीमत तभी करेगी जब आप खुद अपनी अहमियत को पहचानेंगे। अपनी खुशी की चाबी किसी दूसरे के हाथ में न दें, बल्कि खुद अपनी ज़िन्दगी के मालिक और मजबूत सुतुन  बनें।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।