भजन/भावगीत

मां नर्मदे

मन भर उत्साह से चलो नर्मदा तीर ।
मिट जायेगी निश्चित ही जन्म -जन्म की पीर ।।

रंग-बिरंगे घाट सजे मां नर्मदे के
सुमिरन कर लो सब नर-नारी मिलजुल कर ।
पाप कटेंगे, पुण्य मिलेंगे, भवसागर से जायेंगे तर ।।

पूर्ण समर्पण, तन- मन- धन सब अर्पण ।
मां नर्मदा के श्रीचरणों में कर दो स्वयं को अर्पण ।।

भक्ति भाव से मां नर्मदे गुण गाइये
आरती, दीपदान, भजन और ध्यान-स्नान करिए ।
हाथ जोड़ मस्तक नवा हृदय को निर्मल बनाइए ।।

श्रद्धा से पतितपावनी मां नर्मदे दर्शन कर‌ ।
सब जन गाओ जय नर्मदे!, जय नर्मदे! एक स्वर ।।

अमरकंठ से निकली, तेरी महिमा अपरंपार
सहज- सरल ममता की मूरत तू वरदानी ।
हे मां नर्मदे ! अमृत है तेरा निर्मल पानी ।।

मोक्षप्रदायिनी सबकी बिगड़ी बनाने वाली ।
मां नर्मदे पापनाशिनी धर्म की रक्षा करने वाली ।।

— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111