मां नर्मदे
मन भर उत्साह से चलो नर्मदा तीर ।
मिट जायेगी निश्चित ही जन्म -जन्म की पीर ।।
रंग-बिरंगे घाट सजे मां नर्मदे के
सुमिरन कर लो सब नर-नारी मिलजुल कर ।
पाप कटेंगे, पुण्य मिलेंगे, भवसागर से जायेंगे तर ।।
पूर्ण समर्पण, तन- मन- धन सब अर्पण ।
मां नर्मदा के श्रीचरणों में कर दो स्वयं को अर्पण ।।
भक्ति भाव से मां नर्मदे गुण गाइये
आरती, दीपदान, भजन और ध्यान-स्नान करिए ।
हाथ जोड़ मस्तक नवा हृदय को निर्मल बनाइए ।।
श्रद्धा से पतितपावनी मां नर्मदे दर्शन कर ।
सब जन गाओ जय नर्मदे!, जय नर्मदे! एक स्वर ।।
अमरकंठ से निकली, तेरी महिमा अपरंपार
सहज- सरल ममता की मूरत तू वरदानी ।
हे मां नर्मदे ! अमृत है तेरा निर्मल पानी ।।
मोक्षप्रदायिनी सबकी बिगड़ी बनाने वाली ।
मां नर्मदे पापनाशिनी धर्म की रक्षा करने वाली ।।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
