जगन्नाथ धाम – मंदिरों की नगरी (ओडिशा)
जगन्नाथ धाम पुरी की धरती,
भक्ति जहाँ हर श्वास में भरती।
शंख-नाद से गूँज उठे आकाश,
हर कण में बसता प्रभु का वास।
मंदिरों की ये अद्भुत नगरी,
श्रद्धा की यहाँ बहती धारा गहरी।
ऊँचे शिखरों पर ध्वज लहराए,
भक्तों के मन को मोहित बनाए।
रथयात्रा का अनुपम उत्सव,
जग में फैला जिसका गौरव।
भाई-बहन संग प्रभु विराजें,
हर जन के मन में दीप जलाएँ।
सागर की लहरें गान सुनाएँ,
भक्ति रस में मन डूब जाए।
ओडिशा की पावन ये धरा,
हर दिल को करती है हरा-भरा।
जगन्नाथ जी का अद्भुत धाम,
जहाँ मिट जाते सबके ग़म तमाम।
मंदिरों की नगरी ये पुकारे,
आओ भक्तों, चरणों में हमारे॥
— डॉ. आकांक्षा रुपा चचरा
