राजनीति

बाभन ठाकुर वैश्य का हितैषी कौन है?

पहली घटना…

2022 का चुनाव प्रचार चल रहा था… अजित अंजुम अपना कैमरा और माइक लिए घूम रहे थे लेकिन उनके चैनल पर दिखाया गया एक बूढ़े बाबा जी का इंटरव्यू अभूतपूर्व था ।

अजित अंजुम ने पूछा… वोट किसको दोगे…
बाबा जी बोले… योगी को
अजित अंजुम ने पूछा… क्यों ?
बाबा जी ने उल्टा पूछा… कहां गए वो लोग ? जब हिंदुओं की जवान लड़कियां स्कूल के लिए निकलती थीं सड़क से गुज़रती थीं तब सब्जी वाले कुछ जिहादी जोर जोर से चिल्लाने लगते थे… फब्तियां कसते हुए… बड़े बड़े खरबूजे ले लो! लाल लाल टमाटर ले लो !

दूसरी घटना…

2017 से पहले… बरेली में हिंदुओं की बेटियों ने स्कूल जाना छोड़ दिया था क्योंकि रास्ते में एक तालाब पड़ता था जहां पर जिहादी खुलेआम लड़कियों को अपना गुप्तांग दिखाते थे छेड़खानी करते थे ।

अब ज़रा शिखा खोलकर बैठे हुए ब्राह्मणों ध्यान से सोचो… इन दोनों घटनाओं में पीड़ित लड़कियां क्या बाभन, ठाकुर और वैश्य नहीं होती होंगी ?

मैंने भी अपनी शिखा यूजीसी आंदोलन के दौरान जरूर खोली थी लेकिन हर दूसरे तीसरे वीडियो में ये भी कहता था कि योगी आदित्यनाथ पर इस आंदोलन की आंच पड़ी तो देश का बड़ा नुकसान हो जाएगा ! मैं आज भी अपनी एक एक बात पर पहले की तरह कायम हूं । आप लोगों ने ध्यान से सुना नहीं तो गलती आपकी है ! मेरे वो वीडियो आज भी इन शिखा खोलकर बैठे ब्राह्मणों की फेसबुक वॉल पर मौजूद हैं ! खुद जाकर देख लो खुद आप लोगों ने ही शेयर किए थे ।

सामान्य वर्ग की समस्याएं अगर 70 साल में विष बेल का रूप ले चुकी हैं तो इस वेष बेल को हटाने का काम भी धीरे धीरे ही होगा… और हम ही लोग करेंगे किसी शंकराचार्य के बस का ये काम नहीं है ! लेकिन अचानक आपके भावनात्मक फैसले देश को गर्त में डाल देंगे ।

अब योगी को भी हिंदूद्रोही बताने वाले लो आईक्यू लोग मैदान में आ चुके हैं लेकिन उनको ये भी बताना चाहिए कि फिर किस एलियन को वोट दें ?

और मान लो अगर योगी चले गए और फिर कोई जिहादी गुप्तांग दिखाने लगा और कोई चिल्लाने लगा कि बड़े बड़े खरबूजे ले लो ! तो आप लोग फिर क्या जवाब देंगे ? और कहां पर क्या मुंह दिखाएंगे ? ये जवाब भी सोच लेना !

— दिलीप पाण्डेय