युद्ध
युद्ध
आदमी -आदमी के बीच का खून संघर्ष है
युद्ध की आग
इंसानियत को जलाकर राख कर देती है
तीर -कमान, लाठी डंडों,
बंदूक की गोली वाला दौर तो चला गया
अब युद्ध मिसाइलों से लड़ा जाता है
जो इतना हाहाकारी है कि
पल भर में मानवता का अंत कर देता है ।
युद्ध आंसुओं के सागर को जन्म देता है
जो सदियों तक उफनता रहता है
विनाश का चलचित्र दिखाता रहता है
स्वार्थ की आग शहर के शहर खा जाती है
मौत की सौदागरी, ए मानव ! अच्छी नहीं…
ये दुनिया शांति से ही सुंदर लगती है
युद्ध किसी समस्या का हल नहीं !
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
