राजनीति

भारत के हाथ लग गया विश्व यूरेनियम का पूरा कंट्रोल

जो भारत यूरेनियम के लिए दूसरे देशों का नाक रगड़ता था, अब ऐसी नौबत कभी नहीं आएगी। बल्कि विश्व बाजार में यूरेनियम के भाव को कंट्रोल करने की ताकत भी भारत ॱके हाथ आ गई है, दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश कजाकिस्तान ने भारत को भर-भरकर यूरेनियम देने का ऐतिहासिक फैसला कर लिया है। कजातोमप्रॉम के शेयरधारकों ने 92.9% भारी बहुमत से भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ विशाल लंबी अवधि के सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी दे दी। यह डील कंपनी की कुल संपत्ति के 50% से ज्यादा मूल्य की है। कजाकिस्तान, जो वैश्विक यूरेनियम उत्पादन का करीब 40-43% हिस्सा नियंत्रित करता है, अब अपना बड़ा उत्पादन भारत को समर्पित कर रहा है।

पहले भारत में यूरेनियम उत्पादन बहुत कम था (सिर्फ 400 टन के आसपास सालाना), जबकि बढ़ते परमाणु कार्यक्रम की भूख हजारों टन थी। विदेश से खरीदते समय कीमत, मात्रा और शर्तों पर बार-बार समझौता करना पड़ता था। सप्लाई अनिश्चित रहती थी और महंगे स्पॉट मार्केट पर निर्भर रहना पड़ता था। अब यह पुरानी कहानी खत्म हो गई। कजाकिस्तान के साथ यह लंबा कॉन्ट्रैक्ट भारत को ऊर्जा सुरक्षा की मजबूत दीवार देगा। भारत 2030 तक अतिरिक्त 22.5 गीगावॉट और लंबे समय में 100 गीगावॉट परमाणु क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखता है। यूरेनियम की स्थिर और प्रचुर सप्लाई से:

●परमाणु प्लांट बिना किसी रुकावट के चलेंगे
●बिजली सस्ती और स्वच्छ बनेगी
●कोयला और गैस पर निर्भरता घटेगी
●नेट-जीरो लक्ष्य जल्दी हासिल होगा

विश्व यूरेनियम के भाव का कंट्रोल अब भारत के हाथों में भी हो जायेगा, यह सबसे बड़ा और सनसनीखेज बदलाव होगा; भारत अब सिर्फ खरीदार नहीं, बल्कि बाजार को प्रभावित करने वाला मालिकाना खिलाड़ी बन जायेगा।

कजाकिस्तान की 2025 की उत्पादन (25,839 टन) और आने वाले वर्षों का बड़ा हिस्सा लंबी अवधि के लिए भारत को लॉक हो जाएगा। वैश्विक बाजार पहले से ही मांग से ज्यादा उत्पादन की कमी झेल रहा है। अब कजातोमप्रॉम का महत्वपूर्ण उत्पादन बाजार से हट जाएगा, तो स्पॉट मार्केट (खुला बाजार) में यूरेनियम की उपलब्धता और सिकुड़ जाएगी।

नतीजा:
●यूरेनियम की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी
●भारत अपनी जरूरतें पहले ही स्थिर और सस्ते दर पर सुरक्षित कर चुका है, इसलिए महंगाई का कोई झटका नहीं लगेगा
●बाकी देश, खासकर जिन्होंने अभी कॉन्ट्रैक्ट नहीं किए, भारी कीमत चुकाने को मजबूर होंगे

यह ठीक वैसा प्रभाव है जैसे OPEC तेल की सप्लाई और कीमतों को नियंत्रित करता है। भारत-कजाकिस्तान की यह साझेदारी अब वैश्विक यूरेनियम ट्रेड का केंद्र बन गई है। आगे कीमत निर्धारण, नई डील्स और बाजार की दिशा पर भारत का अप्रत्यक्ष लेकिन बहुत मजबूत नियंत्रण बढ़ेगा। भारत चाहे तो अतिरिक्त रणनीतिक सप्लाई के जरिए बाजार को और प्रभावित कर सकता है।

यह खबर चीन के लिए सबसे बड़ा सदमा है। चीन तेजी से अपना परमाणु कार्यक्रम बढ़ा रहा है और कजाकिस्तान उसका प्रमुख यूरेनियम सप्लायर रहा है। अब कजातोमप्रॉम का बड़ा हिस्सा भारत को चला गया, तो चीन को:

●यूरेनियम की कमी का सामना करना पड़ेगा
●महंगे स्पॉट मार्केट से खरीदना पड़ेगा, जिससे उसकी परमाणु परियोजनाएं महंगी हो जाएंगी
●मध्य एशिया में अपनी बेल्ट एंड रोड और संसाधन कूटनीति को बड़ा रणनीतिक झटका लगेगा

यह समझौता महज एक व्यापार सौदा नहीं है — यह भारत की उभरती महाशक्ति का जीता-जागता प्रमाण है। जहां कल तक हमें दूसरों के सामने हाथ फैलाने पड़ते थे, आज हम विश्व यूरेनियम बाजार के भाव और दिशा को नियंत्रित करने की स्थिति में पहुंच गए हैं।

परमाणु कार्यक्रम की रफ्तार बढ़ेगी, अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और विकसित भारत 2047 का सपना और करीब आ जाएगा। अब इंतजार है कि यह यूरेनियम भारत के रिएक्टर्स को कितनी तेज रोशनी देगा और विश्व ऊर्जा भू-राजनीति में भारत को नई सुपरपावर वाली ऊंचाई प्रदान करेगा!

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