अन्य लेख

मेघनाथ घाट, अवधूत आश्रम दर्शनीय है

मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा सर्वत्र पूजनीय है। मां रेवा के प्राचीन घाट सरदार सरोवर के बैक वाटर से प्रभावित होने के कारण आने वाले दिनों में धार जिले की कुक्षी तहसील में नर्मदा तट स्थित मेघनाद घाट के बारे में प्राचीन ग्रंथो में उल्लेख है| जब मेघनाद यहाँ से गुजरा तो उसके पास दो शिव लिंग थे | एक शिवलिंग हाथ से छूट कर माँ नर्मदा नदी में जा गिरा |मेघनाथ उसी स्थल पर विश्राम कर तपस्या की | किवदंती है कि नर्मदा नदी के मेघनाथ घाट में स्नान करने से सौ ।मेघनाद का जन्म रावण के पुत्र के रूप में हुआ था और उसे इंद्रजीत का नाम तब मिला जब उसने इंद्र को हराया और बंदी बना लिया. रामायण में, मेघनाद एक शक्तिशाली योद्धा के रूप में वर्णित है, जो मायावी विद्याओं में निपुण था और राम-रावण युद्ध में एक प्रमुख भूमिका निभाता है. अन्ततः मेघनाद अपनी कठोर तपस्या में सफल हुआ और भगवान शिव ने उसे दर्शन दिए। भगवान शिव ने उसे कई सारे अस्त्र-शस्त्र, शक्तियां और सिद्धियां प्रदान की। परन्तु उन्होंने मेघनाद को सावधान भी कर दिया कि कभी भूल कर भी किसी ऐसे ब्रह्मचारी का दर्शन ना करे जो 12 वर्षों से कठोर ब्रह्मचर्य और तपश्चार्य का पालन कर रहा हो ।कोटेश्वर घाट सरदार सरोवर के बेक वाटर के चलते डूब प्रभावित होने के कारण कुक्षी तहसील के अधिकांश आसपास के गांव के श्रद्धालु मेघनाथ घाट आते है। यह घाट कोटेश्वर के पश्चिम क्षेत्र में स्थित पहाड़ी क्षेत्र नर्मदा तट ग्राम चंदनखेड़ी में है। यह स्थान अति प्राचीन तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। जिसका वर्णन नर्मदा पुराण में भी मिलता है। किवदंतियों के अनुसार यहां अतिप्राचीन तपस्थली मेघनाद ने घोर तपस्या की थी। यह प्राचीनतम घाट है।नदी में स्नान से अश्वमेघयज्ञ का फल प्राप्त होता है| इसके नजदीक अवधूतानंद आश्रम है जो मेघनाथ घाट के समीप है | ये आश्रम और सामने बड़े बड़े पहाड़,हरियाली से आच्छादित और तट पर नर्मदा नदी बहती है | इसके आसपास बेक वाटर भी जल स्तर बढ़ने से आ जाता है | इसके लिए वहाँ नाव का सहारा लिया जाता है | नर्मदा नदी के तट जितने भी आश्रम है वे तप,शांति मन को सुकून देने वाले है|आश्रम में रहने वाले सिद्ध महात्माओं के दर्शन और उनके मुखारविंद से सनातन संबंधी उपदेश सुनने और आश्रम की सेवा हेतु अन्य प्रदेशों से श्रद्धालु आते है और एक शांति का अनुभव पाते हअ| इन दर्शनीय स्थलों पर अवश्य जाना चाहिए| इन घाटों,आश्रम के दर्शन हेतु,तत्कालीन मुख्यमंत्री जी एवं वर्तमान मुख्यमंत्री जी भी आ चुके है|साथ ही घाट को बेहतर बनाए जाने हेतु उनके एवं स्थानीय क्षेत्र के लोगों प्रयत्न जारी है| आसपास के जिलों से श्रद्धालुओं तथा परिक्रमा वासियों का आवागमन बढ़ जाने से यहां पर आयोजित होने वाले सत्संगों द्वारा धार्मिक, सामाजिक समानता के साथ साथ समरसता का भाव जगता है|मध्य प्रदेश में धार जिले के नर्मदा किनारे चंदनखेड़ी मेघनाद घाट अब नदी पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां से गुजरात की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक क्रूज संचालन केवड़िया तक 120 किमी में प्रदेश का पहला अंतरप्रांतीय जलमार्ग शीघ्र बन कर तैयार हो रहा है।अवधूत आश्रम के मोरम दृश्य वाकई मन मोह ले कर अंतरात्मा से पुनीत भाव जाग उठते हअ| और शब्द निकलते है”नर्मदे हर”|

— संजय वर्मा ‘दृष्टि’

*संजय वर्मा 'दृष्टि'

पूरा नाम:- संजय वर्मा "दॄष्टि " 2-पिता का नाम:- श्री शांतीलालजी वर्मा 3-वर्तमान/स्थायी पता "-125 शहीद भगत सिंग मार्ग मनावर जिला -धार ( म प्र ) 454446 4-फोन नं/वाटस एप नं/ई मेल:- 07294 233656 /9893070756 /antriksh.sanjay@gmail.com 5-शिक्षा/जन्म तिथि- आय टी आय / 2-5-1962 (उज्जैन ) 6-व्यवसाय:- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग ) 7-प्रकाशन विवरण .प्रकाशन - देश -विदेश की विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में रचनाएँ व् समाचार पत्रों में निरंतर रचनाओं और पत्र का प्रकाशन ,प्रकाशित काव्य कृति "दरवाजे पर दस्तक " खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा -अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के 65 रचनाकारों में लेखनीयता में सहभागिता भारत की और से सम्मान-2015 /अनेक साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित -संस्थाओं से सम्बद्धता ):-शब्दप्रवाह उज्जैन ,यशधारा - धार, लघूकथा संस्था जबलपुर में उप संपादक -काव्य मंच/आकाशवाणी/ पर काव्य पाठ :-शगुन काव्य मंच

Leave a Reply