कविता

नेता जी

पढ़ लिख हम पछता रहे 

काहे किये समय बर्बाद 

पढ़ के का मिल गया 

मिली जिंदगी में खिचंखास

जो बन जाते गली के दादा 

करते गुंडई 

हो जाते एक दिन नेता 

मिट जाती सब चकल्लस 

होती अपनी जय जय कार 

विधान सभा में बैठे होते 

कहलाते विधायक 

या विराजमान हो जाते संसद में 

बनकर इलाके के सांसद 

नोटों में खेल रहे होते 

पढ़े लिखे अधिकारी 

जी हजूरी करते 

जिसके लिए खाये हमनें 

बाप के थप्पड़ चप्पल 

चमचे होते दाएं बाएं 

मर कर अमर हो जाते 

चौराहों पर लग जाती मूरत 

हर साल याद किये जाते 

बेनाम तो नहीं मरते 

बाल बच्चों की भी हो जाती पों बारह 

आती नियमित पेंशन 

मिलती जीवन की हर सुविधा 

जब तक़ रहते जीवित 

हम हैं एम ए पी एच डी 

वो अंगूठा टेक 

*ब्रजेश गुप्ता

मैं भारतीय स्टेट बैंक ,आगरा के प्रशासनिक कार्यालय से प्रबंधक के रूप में 2015 में रिटायर्ड हुआ हूं वर्तमान में पुष्पांजलि गार्डेनिया, सिकंदरा में रिटायर्ड जीवन व्यतीत कर रहा है कुछ माह से मैं अपने विचारों का संकलन कर रहा हूं M- 9917474020