गीत/नवगीत

यह कथा है नमकहरामों की

पीट रहे जो छाती हरदम, इनकी कथा सुनाता हूं,
मोदी का हौआ है कैसा….आज तुम्हे बतलाता हूं।

पवन खेड़ा कुत्ते सा भौंके, करता मोदी का अपमान
गली का कुत्ता काम भोंकना, यही है तो इसकी पहचान

पप्पू पर तो पक्का मानो…..किसी भूत का साया है,
चाल तमाशा और जनेऊ, कुछ भी काम न आया है।

खुद ED के चक्कर काटे…….मोदी को भ्रष्टाचारी,
दु:खी आत्मा है यह प्राणी, समझो इसकी लाचारी।

गुंडाराज है मोदीयुग में………कहता है सुरजेवाला,
मौत का सौदागर है मोदी, कहती यह इटली बाला।

कोई मदारी, कोई हिटलर…कोई नाली का कीड़ा,
कायर, नीच कहा भस्मासुर, कैसी है इनकी पीड़ा।

जहर उगलते हैं मौलाना……ऊपर से यह खाली हैं,
जुम्मा को यह करते दंगे, फितरत इनकी काली है।

भेड़ खाल में और भेड़िए…जाने ही यह कितने हैं,
सबका नम्बर लगने वाला, चाहे यह भी जितने हैं।

औकात समझ लीजे इनकी, ज्यूं खेत में खर पतवार,
रमेश, रेणुका, अय्यर, पप्पू …..सभी देश के हैं गद्दार।

सुनो देश के नमकहरामो, कितनी भी बकवास करो,
गधा न घोड़ा बन सकता है, चाहे जितना जहर भरो।

— राजेन्द्र महाजन ‘रंजन’