गंगा अवतरण उजियारा
गंगा अवतरण का पावन पर्व,
लेके आया है शुभ उजियारा।
श्रद्धा, भक्ति और आस्था से,
गूंज उठा हैं हर घाट किनारा।
यूं ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन,
इस धरती पर गंगा आई थीं।
भगीरथ की कठोर तपस्या से,
माँ सबका उद्धार कराई थीं।
गंगा जल की ये निर्मल धारा,
यहाँ पे पापों को हर लेती है।
गर मन में सच्ची श्रद्धा हो तो,
ये जीवन के हर सुख देती है।
दीप जलाकर, दान-पुण्य कर,
सूर्य देवता को ‘अर्घ्य’ चढ़ाएँ।
माँ गंगा के इस पावन जल से,
तन-मन अपना पवित्र बनाएँ।
ये गंगा दशहरा का पावन पर्व,
आस्था-श्रद्धा सन्देश सुनाता।
सत्य, सेवा और सद्भावना से,
हमारा जीवन है सुंदर बनाता।
— संजय एम तराणेकर
