गीत/नवगीत

कर्म का कोई विकल्प नहीं है

अविरल चलना जीवन पथ पर, यात्रा है, कोई संकल्प नहीं है।
कर्म बिना कोई जी नहीं सकता, कर्म का कोई विकल्प नहीं है।।
चाह से चुनी हो या अनचाहे।
दुख में या सुख में अवगाहे।
यात्रा का आनंद ले प्यारे,
गंतव्य पहाड़ हो या हो माहे।
जीवन जिओ,आनंद का पथ है, जीवन,कोई प्रकल्प नहीं है।
कर्म बिना कोई जी नहीं सकता, कर्म का कोई विकल्प नहीं है।।
नफरत से भी प्यार करें हम।
चाह करें क्यूँ? विश्वास करें तुम।
पैसा सब कुछ तुम्हारे लिए है,
हमारे लिए तो सब कुछ हो तुम।
कर्म के बल पर मिला जो पथ पर, पर्याप्त है वह, स्वल्प नहीं है।
कर्म बिना कोई जी नहीं सकता, कर्म का कोई विकल्प नहीं है।।
कर्म ही केवल,विकास के पथ हैं।
कर्म ही सबके, जीवन के रथ हैं।
कर्म के बिन निष्क्रिय मृत शरीर,
कर्म ही सबके जीवन का अथ है।
कर्म समाया है अंग-अंग में, कर्म बिन कोई अभिकल्प नहीं है।
कर्म बिना कोई जी नहीं सकता, कर्म का कोई विकल्प नहीं है।।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)

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