इतिहास

जैसे पिता, वैसे ही पुत्र

डॉ. विजय गर्ग (सेवानिवृत्त प्रिंसिपल) और डॉ. अंकुश गर्ग (एमडी) की प्रेरणादायक यात्रा

यह कहा जाता है कि बच्चे अपने माता-पिता की सबसे बड़ी विरासत होते हैं। वे केवल नाम और पहचान ही नहीं, बल्कि संस्कार, मूल्य और जीवन-दृष्टि भी उनसे प्राप्त करते हैं। जब एक पिता अपने कर्म, समर्पण और समाज सेवा से उदाहरण प्रस्तुत करता है, तो उसकी छाप अगली पीढ़ी में भी दिखाई देती है। डॉ. विजय गर्ग और उनके पुत्र डॉ. अंकुश गर्ग की कहानी इसी सत्य का सुंदर उदाहरण है।

डॉ. विजय गर्ग ने शिक्षा जगत में अपना जीवन समर्पित किया। एक शिक्षक से लेकर प्रिंसिपल तक की उनकी यात्रा मेहनत, अनुशासन और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति समर्पण से भरी रही। उन्होंने न केवल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में योगदान दिया, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच का विकास करने का भी प्रयास किया। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे लेखन, सामाजिक जागरूकता और जनहित के मुद्दों पर अपने विचारों के माध्यम से समाज को दिशा दे रहे हैं।

उनके पुत्र डॉ. अंकुश गर्ग ने भी सेवा का मार्ग चुना, लेकिन चिकित्सा के क्षेत्र में। एमडी की उपाधि प्राप्त करने के बाद वे मरीजों की सेवा में समर्पित हैं। एक कुशल चिकित्सक के रूप में वे न केवल रोगों का उपचार करते हैं, बल्कि मरीजों को विश्वास, सहानुभूति और मानवीय संवेदनाओं का भी अनुभव कराते हैं। चिकित्सा के प्रति उनकी निष्ठा और सेवा-भाव उन्हें एक उत्कृष्ट डॉक्टर के रूप में स्थापित करती है।

पिता और पुत्र दोनों के कार्यक्षेत्र अलग हैं, लेकिन उनकी सोच और उद्देश्य समान हैं—समाज की सेवा और लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना। एक ने शिक्षा के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारा, तो दूसरे ने स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से अनगिनत लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का कार्य किया।

आज के दौर में, जब सफलता को अक्सर केवल आर्थिक उपलब्धियों से मापा जाता है, डॉ. विजय गर्ग और डॉ. अंकुश गर्ग की यात्रा यह संदेश देती है कि सच्ची सफलता समाज के लिए उपयोगी बनने में है। उनकी कहानी हमें बताती है कि अच्छे संस्कार, कड़ी मेहनत और सेवा-भावना पीढ़ियों तक प्रभाव छोड़ते हैं।

डॉ. विजय गर्ग और डॉ. अंकुश गर्ग की यह प्रेरणादायक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि जब एक पीढ़ी आदर्श स्थापित करती है, तो अगली पीढ़ी उन्हें आगे बढ़ाकर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाती है। वास्तव में, “जैसे पिता, वैसे ही पुत्र” केवल एक कहावत नहीं, बल्कि उनके जीवन में साकार हुई एक प्रेरक सच्चाई है।

— डॉ. विजय गर्ग

*डॉ. विजय गर्ग

शैक्षिक स्तंभकार, मलोट

Leave a Reply