हाइकु – गौरैया की व्यथा
डालें टूटी हैं
गौरैया कहां बैठे
किससे कहे
फुदकती थी
जिस अंगना, वो भी
खत्म हो गए
वन्य नहीं मैं
हूं, घरेलू चिड़िया
जैसे बिटिया
— मनु वाशिष्ठ
डालें टूटी हैं
गौरैया कहां बैठे
किससे कहे
फुदकती थी
जिस अंगना, वो भी
खत्म हो गए
वन्य नहीं मैं
हूं, घरेलू चिड़िया
जैसे बिटिया
— मनु वाशिष्ठ