पापा संग बचपन
पापा संग जब खेलता, नन्हा प्यारा लाल।
हँसी-खुशी से भर उठे, घर का हर इक हाल॥
पापा का हाथ पकड़कर, चलता नन्हा पाँव।
पापा संग अच्छा लगे, अपना प्यारा गाँव॥
पापा देते प्यार जब, खिल उठे मुस्कान।
उनके मीठे बोल से, खुश रहता नादान॥
पापा मेरी शान हैं, पापा मेरा प्यार।
उनके संग हर दिन लगे, जैसे कोई त्योहार॥
पापा संग मैं घूमता, मन में भरकर प्यार।
उनके संग हर राह में, खुशियाँ मिलें अपार॥
पापा मेरी ताकत हैं, पापा मेरी आस।
उनके संग हर पल मुझे, मिलता नया विश्वास॥
पापा मेरे दोस्त हैं, पापा मेरे यार।
उनके संग हँसता रहूँ, पाकर खूब दुलार॥
पापा की प्यारी गोद में, मिलता सुख अनमोल।
उनके स्नेह से खिल उठे, मेरे मन के बोल॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
