कविता – सुख-दुःख हैं जीवन के मेहमान
सुख-दुःख जीवन के,बस मेहमान हुआ करते हैं,
बारी-बारी आकर कुछ पल रुककर रवाना हुआ करते हैं,
कभी हँसी की धूप खिलाते,कभी आँसू दे जाते हैं,
इन्हीं के संग जीवन के अनमोल सबक मिल जाते हैं।
सुख आए तो मुस्काकर,दुःख आए तो घबराना मत,
दोनों की अपनी भूमिका है,किसी से भी कतराना मत,
दुःख की तपिश न होगी तो सुख की कीमत कैसे जानोगे,
ठोकर न मिले राहों में तो मंज़िल की अहमियत क्या मानोगे।
हर पीड़ा अपने भीतर कोई अनुभव छोड़ जाती है,
हर ठोकर इंसान को जीने की कला सिखाती है,
जो आज कठिन लगती है,कल वही कहानी बन जाएगी,
वक्त की धारा हर तकलीफ़ को धीरे-धीरे बहा ले जाएगी।
दूसरों के दुःख को देखो तो केवल आँखों से मत देखो,
टूटे हुए दिल की खामोशी को भावों से भी परखो,
दुनियाँ में ऐसा चश्मा किसी दुकान पर नहीं मिलता,
संवेदनशील मन हो तो हर दर्द साफ़-साफ़ दिखता।
सुख-दुःख आते-जाते हैं,जीवन चलता रहता है,
आज जो आँसू देता है,कल वही मुस्कान कहता है,
किशन मन में करुणा रखो और भावों की नज़र जगाए रखो,
अपने साथ-साथ दूसरों के दर्द को भी समझते रहो।
— किशन सनमुखदास भावनानी
