बहुजन समाज पार्टी (बसपा) शासन की वर्तमान परिदृश्य में प्रासंगिकता
वर्तमान समय में जब देश की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, तब एक ऐसी सरकार की आवश्यकता हर नागरिक महसूस कर रहा है जो केवल वादे न करे, बल्कि जमीन पर ठोस काम करके दिखाए। आज जनता को एक ऐसी सत्ता की तलाश है जो संविधानवादी हो, कानून व्यवस्था को मजबूत आधार दे, समाज में दंगों और अराजकता को पूरी तरह समाप्त करे, और अमीर-गरीब या जाति-धर्म का भेद किए बिना ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर काम करे। इस कसौटी पर जब हम भारतीय राजनीति के इतिहास और वर्तमान परिदृश्य का आकलन करते हैं, तो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के शासनकाल और आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी का सशक्त, दूरदर्शी नेतृत्व एक आदर्श विकल्प के रूप में सामने आता है। समता, समानता और बंधुत्व के संवैधानिक मूल्यों को धरातल पर उतारने के लिए आज बसपा शासन की नीतियां बेहद प्रासंगिक हो गई हैं।
सशक्त नेतृत्व और लौह महिला की छवि
उत्तर प्रदेश में चार बार मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए बहन मायावती जी ने प्रशासनिक नियंत्रण की एक ऐसी मिसाल कायम की, जिसकी सराहना उनके राजनीतिक विरोधी भी करते हैं। उन्हें भारतीय राजनीति की ‘लौह महिला’ कहा जाता है, क्योंकि उनका नेतृत्व समझौताविहीन और कड़ा रहा है। एक सशक्त नेता वही होता है जिसका डर अपराधियों में हो और भरोसा आम जनता में। बहन जी के शासनकाल में नौकरशाही और पुलिस प्रशासन पूरी तरह जवाबदेह थे। किसी भी प्रकार की कोताही या भ्रष्टाचार पर तत्काल कार्रवाई होती थी, चाहे दोषी कितना भी रसूखदार क्यों न हो। वर्तमान समय में जहां प्रशासनिक शिथिलता और राजनीतिक संरक्षण के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद दिखते हैं, वहां बहन मायावती जी जैसे दृढ़ इच्छाशक्ति वाले नेतृत्व की कमी साफ खलती है। उनका विजन स्पष्ट है—सत्ता का उपयोग किसी खास वर्ग को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज में व्यवस्था स्थापित करने के लिए होना चाहिए।
कानून का राज और दंगामुक्त समाज
किसी भी सभ्य समाज और देश के विकास की पहली शर्त होती है—मजबूत कानून व्यवस्था। यदि नागरिक सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, तो आर्थिक तरक्की और सामाजिक खुशहाली की कल्पना भी नहीं की जा सकती। बहन मायावती जी के मुख्यमंत्रित्व काल की सबसे बड़ी उपलब्धि यही थी कि उन्होंने ‘कानून द्वारा कानून का राज’ (Rule of Law) स्थापित किया। उनके शासन में उत्तर प्रदेश, जो कभी अपराध और माफिया राज के लिए जाना जाता था, पूरी तरह शांत और सुरक्षित प्रदेश बन गया था।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनके कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में एक भी बड़ा सांप्रदायिक या जातिगत दंगा नहीं हुआ। उन्होंने दंगाइयों और समाज विरोधी तत्वों को कड़ा संदेश दिया कि समाज की शांति भंग करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा। आज जब देश के विभिन्न हिस्सों में जातिगत वैमनस्य और सांप्रदायिक तनाव की खबरें आम हो चुकी हैं, तब बसपा शासन का वह ‘दंगामुक्त मॉडल’ याद आता है। बहन जी ने यह साबित किया कि यदि नेतृत्व ईमानदार और सख्त हो, तो पुलिस बिना किसी राजनीतिक दबाव के काम कर सकती है और समाज में अमन-चैन कायम रखा जा सकता है।
सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय: अमीर-गरीब और सर्वजाति का पसंदीदा शासन
बसपा ने अपनी राजनीतिक यात्रा बहुजन समाज से शुरू की थी, लेकिन बहन मायावती जी ने इसे और व्यापक बनाते हुए ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के महान विचार में बदला। उनका शासन किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने समाज के हर तबके—चाहे वह दलित हो, पिछड़ा हो, अल्पसंख्यक हो, या सवर्ण समाज का गरीब हो—सभी के कल्याण के लिए काम किया।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए उन्होंने ऐतिहासिक योजनाएं चलाईं। महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना, सावित्रीबाई फुले बालिका शिक्षा मदद योजना और कांशीराम जी शहरी गरीब आवास योजना जैसी पहलों ने समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को संबल दिया। अमीर और गरीब के बीच की खाई को पाटने के लिए उन्होंने न केवल रोजगार के अवसर पैदा किए, बल्कि भूमिहीनों को कृषि भूमि के पट्टे भी आवंटित किए। यही कारण है कि बसपा शासन आज भी सर्वजाति का पसंदीदा शासन माना जाता है, क्योंकि इसमें हर नागरिक को लगता था कि यह सरकार उसकी अपनी सरकार है और उसके साथ कोई अन्याय नहीं होगा।
समता, समानता और बंधुत्व के संवैधानिक मूल्यों के पक्षधर
भारतीय संविधान के प्रस्तावना की आत्मा तीन शब्दों में बसती है—समता (Equity), समानता (Equality) और बंधुत्व (Fraternity)। बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जिस भारत का सपना देखा था, उसे व्यावहारिक रूप देने का काम बहन मायावती जी ने अपने नीतिगत फैसलों के जरिए किया। वह एक सच्ची संविधानवादी नेता हैं, जो मानती हैं कि जब तक समाज में सामाजिक और आर्थिक समानता नहीं आएगी, तब तक राजनीतिक स्वतंत्रता अधूरी है।
उनके शासन में सामाजिक न्याय केवल एक नारा नहीं था, बल्कि उसे प्रशासनिक स्तर पर लागू किया गया। सरकारी नौकरियों में बैकलॉग के पदों को रिकॉर्ड समय में भरा गया ताकि वंचित वर्गों को प्रतिनिधित्व मिल सके। इसके साथ ही, उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बंधुत्व की भावना को बढ़ावा देने के लिए महापुरुषों के सम्मान में स्मारकों, पार्कों और नए जिलों का निर्माण कराया। इन कदमों का उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि सदियों से उपेक्षित रहे समाज को आत्मसम्मान की मुख्यधारा से जोड़ना था। जब समाज का हर वर्ग आत्मसम्मान महसूस करता है, तभी सच्चे भाईचारे या बंधुत्व का निर्माण होता है।
दूरदर्शी सोच और बुनियादी ढांचे का विकास
बहन मायावती जी को अक्सर सामाजिक न्याय की नेता के रूप में देखा जाता है, लेकिन उनका आर्थिक और बुनियादी विकास का विजन भी उतना ही आधुनिक और दूरदर्शी था। आज उत्तर प्रदेश में जिस बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की तारीफ होती है, उसकी नींव बसपा शासनकाल में ही रखी गई थी। देश का पहला आधुनिक एक्सप्रेसवे—’यमुना एक्सप्रेसवे’—बहन जी की ही दूरदर्शी सोच का परिणाम था। उन्होंने केवल कनेक्टिविटी पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि एक्सप्रेसवे के किनारे नए औद्योगिक नगरों (जैसे ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी क्षेत्र) के विकास की रूपरेखा तैयार की, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार मिला।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, महामाया तकनीकी विश्वविद्यालय और कई मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की ताकि राज्य के युवाओं को उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े। बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए नए पावर प्लांट लगाए गए और कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आधुनिक पुलिस थानों का निर्माण किया गया। यह दिखाता है कि उनके पास समाज सुधार के साथ-साथ राज्य को आर्थिक महाशक्ति बनाने का एक बेहतरीन विजन था।
वर्तमान परिदृश्य में बसपा शासन की आवश्यकता क्यों?
आज का राजनीतिक परिदृश्य अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण हो चुका है। राजनीति में जनता के असली मुद्दों—जैसे बेरोजगारी, महंगाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा—के बजाय ध्रुवीकरण, लोक-लुभावन वादों और खोखले प्रचार का बोलबाला बढ़ गया है। ऐसे समय में बसपा शासन की नीतियां और बहन मायावती जी का नेतृत्व देश और राज्यों के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता बन जाता है, जिसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
अराजकता और डर से मुक्ति: आज आम नागरिक, विशेषकर महिलाएं और कमजोर वर्ग, सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। बहन जी का शासन आते ही अपराधियों में जो खौफ पैदा होता है, वह समाज में सुरक्षा की भावना लौटाने के लिए जरूरी है।
सच्ची धर्मनिरपेक्षता और शांति: देश के आर्थिक विकास के लिए सामाजिक शांति अनिवार्य है। बसपा का मॉडल दंगों को रोकने और सभी धर्मों के बीच सद्भाव बनाए रखने में पूरी तरह सफल रहा है।
संतुलित विकास: आज विकास के नाम पर कुछ बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का आरोप सरकारों पर लगता है। इसके विपरीत, बसपा शासन पूंजीपतियों की मदद के साथ-साथ गरीबों के कल्याण को प्राथमिकता देता है, जिससे समावेशी विकास (Inclusive Growth) संभव होता है।
संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान: वर्तमान में संवैधानिक मर्यादाओं और संस्थाओं की स्वायत्तता पर उठ रहे सवालों के बीच, बहन जी का संविधान के प्रति अडिग विश्वास और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन देश को स्थिरता दे सकता है।
संक्षेप में कहें तो, बहुजन समाज पार्टी का शासनकाल केवल सत्ता चलाने का दौर नहीं था, बल्कि वह सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक आत्मनिर्भरता का एक जीवंत आंदोलन था। आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी ने अपने कार्यों से यह साबित किया कि एक संवेदनशील, दूरदर्शी और दृढ़ संकल्पित नेतृत्व किस प्रकार पूरे प्रदेश की तकदीर बदल सकता है।
आज जब समाज जाति, धर्म और आर्थिक असमानता के दौर से गुजर रहा है, तब समता, समानता और बंधुत्व की भावना को पुनर्जीवित करने के लिए बसपा शासन की नीतियां बेहद प्रासंगिक हैं। देश को आज एक ऐसे नेतृत्व की सख्त जरूरत है जो बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक को सुरक्षा, सम्मान और तरक्की के समान अवसर दे सके। ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के इसी संकल्प को पूरा करने के लिए वर्तमान परिदृश्य में बहन मायावती जी के हाथों को मजबूत करना और बसपा के सुशासन मॉडल को वापस लाना समय की सबसे बड़ी मांग है।
— पूर्वी लहरे
