कविता

बहन का भाई

बहन ही होती है
भाई की बुराई कभी नहीं करती
और न सुन सकती है
अपमान भरे शब्द
अभावग्रस्त भाई से
कुछ आशा भी नहीं करती है
वह जानती है
भाई एक ताकत है
जो होता है जीवन भर
महकते हुए फूल की तरह
उसके आंगन को
सुशोभित करता है
भाई का एक रुप यह भी है
कोई बहन का सरेबाजार में
अपमान नहीं कर सकता है
भाई एक कीमती हार की तरह
बहन के गले का रौनक होता है
जब सब आशाओं की रस्सी टूट जाये
तब भाई की कलाई का धागा
बहन की हिफाजत करता है

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com